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रावत ने बिजली के 'करंट' से उत्तराखंड को दी राहत

Fri, 09 May 2014 09:27 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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चुनाव खत्म होते ही रावत सरकार ने उत्तराखंड में तोहफों की झड़ी लगा दी है। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को विद्युत नियामक आयोग इस बार बड़ी राहत देने जा रहा है।
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आयोग ने उत्तराखंड पावर कारपोरेशन (यूपीसीएल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजीवीएनएल) व पावर ट्रांसमिशन कारपारेशन (पिटकुल) के बिजली की दरें बढ़ाने के सभी तर्कों को खारिज कर दिया है।

आयोग के अध्यक्ष सीएस शर्मा ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता में साफ कहा कि इस बार किसी भी सूरत में बिजली की दरें नहीं बढ़ेंगी।

यूपीसीएल को साफ कह दिया गया है कि घाटा कम करने के लिए वह बिजली विभाग के कर्मचारियों और पेंशनर्स को मुफ्त बिजली देने की समीक्षा करे।

ये थे बढ़ोतरी प्रस्ताव

निगमों ने वर्तमान दरों में 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। यूपीसीएल अपने 8,800 कर्मचारियों और पेंशनर्स के परिवारों को साल भर में करीब 20 करोड़ रुपए की बिजली मुफ्त दे रहा है।

आयोग ने दो टूक कहा कि यूपीसीएल इस राशि का भार उपभोक्ताओं पर न डाले।

बढ़ोतरी प्रस्ताव
यूपीसीएल- 20 फीसदी
पिटकुल- 18 फीसदी
यूजीवीएनएल- 15 फीसदी

व्यवसायियों से 3 साल तक बिजली-पानी के बिल नहीं

चुनावी मैदान से करीब दो महीने बाद लौटे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने काम की शुरूआत चार धाम से की।

बृहस्पतिवार देर शाम कैबिनेट की बैठक बुलाकर यात्रा से जुड़ी सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। सरकार चाहती है कि यात्रा शुरू होने की जानकारी का बेहतर प्रचार किया जाए ताकि अधिक से अधिक यात्री पहुंचे।

यात्रा को रोजगार और व्यवसाय से जोड़ने के लिए सरकार ने वहां के चिंहित व्यवसायियों से तीन साल तक बिजली-पानी के बिल का भुगतान न लेने के निर्देश दिए हैं।

इसका लाभ वहां के होटल और अन्य दुकानदारों को मिलेगा।

बैठक में सड़क मार्ग को और दुरुस्त करने, यात्रियों के ठहरने के लिए और अधिक कैंप लगाने, पेयजल व्यवस्था केसाथ और शौचालयों का निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने संबंधी निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

गौरीकुंड से रामबाड़ा तक तीन पुल बने

करीब साढ़े तीन घंटे तक सचिवालय में चली कैबिनेट में विशेष रूप से केदारनाथ व बदरीनाथ की व्यवस्थाओं में बढ़ोत्तरी के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि अधिकांश सड़क मार्गों पर ब्लैक टॉपिंग कर दी गई है। डीजीबीआर सोनप्रयाग से गौरीकुंड पार्किंग तक वैकल्पिक ट्रैक रूट भी बना रहा है।

गौरीकुंड से रामबाड़ा तक तीन पुल बनाये जा चुके हैं। लिंचौली से केदारनाथ तक आसान ढलान का वैकल्पिक पैदल मार्ग 30 मई तक तैयार कर लिया जाएगा।

बैठक में यह हुआ कि लिंचोली, छोटी लिंचोली के पास बेस कैंप और गौरीकुंड में यात्रियों के ठहरने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जाए।

केदारनाथ के लिये 12 से हेलीकॉप्टर सेवाएं होंगी प्रारम्भ

नागरिक उड्डयन के अधिकारियों ने बताया कि लिंचौली से केदारनाथ के लिये 12 मई से हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रारम्भ कर दी जाएंगी।

कैबिनेट ने फैसला लिया है कि मौसम की अनिश्चिता को देखते हुए केदारनाथ के लिए प्रतिदिन अधिकतम 500 यात्रियों को अनुमति दी जाए।

इनमें सौ यात्री उत्तराखंड के होगें। केदारनाथ में बुजुर्ग यात्रियों के लिए गोल्फ काट की व्यवस्था की जाएगी।

कैबिनेट ने लिंचौली से केदारनाथ के लिए रोपवे निर्माण की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए भी सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया।

बताया कि केदारनाथ, गौरीकुंड, लिंचौली व सोनप्रयाग में ऑक्सीजन सिलेण्डर व अन्य आवश्यक उपकरणों व दवाईयों सहित चिकित्सकों की तैनाती की गई है।

अगले 2 सप्ताह में केदारनाथ में 100 व लिंचौली में 30 टॉयलेट का निर्माण कर दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त कैबिनेट ने नदियों के तलछट ऊंचे हो जाने से आगामी बरसात में बाढ़ की सम्भावनाओं को देखते हुए मशीनों की सहायता से पानी की निकासी का मार्ग बनाने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिये।

कैबिनेट ने यात्रियों के खानपान के साथ यात्रा और आपदा से जुड़े इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और दुरुस्त करने को कहा है।
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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षकों की भर्ती आसान होगी

कैबिनेट ने सभी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में शिथिलीकरण के लिए प्रस्ताव आगामी कैबिनेट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।

राज्य में वर्ग 3 की भूमि के नियमितीकरण का शासनादेश एक सप्ताह में निर्गत करने के निर्देश दिए गये।

कैबिनेट में यह भी तय किया गया है कि कार्यों में तेजी लाने के लिए समस्त विभाग टेंडर से सम्बन्धित विज्ञापन सीधे ही अखबारों को जारी कर सकते है। सूचना विभाग विकासात्मक व नीति संबंधी विज्ञापन का कार्य देखेगा।

अमृता, नैथानी प्रीतम गैरहाजिर
करीब दो महीने बाद हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार के तीन मंत्री गैरहाजिर थे।

पर्यटन मंत्री अमृता रावत, शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और गृह मंत्री प्रीतम सिंह कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंचे। पिछले दिनों प्रीतम सिंह पैर की हड्डी टूटने की वजह से चुनाव प्रचार से भी दूर रहे थे।

सतपाल महाराज के कांग्रेस छोड़ने के बाद शेष दोनों मंत्रियों की आस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
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