आपदा की भेंट चढ़े झूला पुल की जगह लगी ट्राली के रस्से का नट वोल्ट निकले से उसमें सवार तीन जिंदगियां काफी समय तक हवा में झूलती रहीं।
घटना से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। कोल्टा के ग्रामीणों ने दूसरे रस्से को खींचकर किसी तरह से तीनों लोगों को सुरक्षित निकाला। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग की लापरवाही करार देते हुए आक्रोश जताया है।
नदी के बीचोंबीच निकल गया नट
जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे कोल्टा गांव के दो स्कूली बच्चे और एक वृद्धा अलकनंदा नदी पर लगी ट्राली से बगवान आ रहे थे।
बगवान की तरफ से गांव के ही सोहन सिंह, नीरज, शुभम, विकास ट्राली का रस्सा खींचे रहे थे। इसी दौरान ट्राली पर रस्से के साथ लगा नट वोल्ट निकल गया जिससे तीनों लोग अलकनंदा के ऊपर झूलने लगे।
नट बोल्ट निकलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना कोल्टा के ग्रामीणों को दी गई। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर कोल्टा गांव की तरफ लगे रस्से को खींचकर तीनों लोगों को सुरक्षित ट्राली से उतारा। इसके बाद ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
मैनुअल ट्राली बनी मुसीबत
अलकनंदा नदी पर बना झूला पुल पिछले वर्ष जून महीने की आपदा की भेंट चढ़ गया था। पुल बहने से कई गांवों का संपर्क बगवान से कट गया।
करीब आठ महीने बाद एक गैर सरकारी संगठन की मदद से लोक निर्माण विभाग ने यहां ट्राली तो लगाई लेकिन ट्राली को हाथ से खींचकर चलाया जा रहा है जबकि इसे मशीन से चलाया जाना था।
विभागीय अधिकारी शुरू से ही मशीन के पूरे पार्ट नहीं पहुंचने की बात कह रहे हैं। कोल्टा के नवयुवक मंगल दल के अध्यक्ष गणेश भट्ट ने कहा कि विभाग ट्राली के संचालन को लेकर गंभीर नहीं है। जिससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
50 किमी घूमकर आएगी बारात
अलकनंदा पर पुल नहीं होने से करीब 25 गांवों की दूरी बगवान से पचास किलोमीटर बढ़ गई है। शुक्रवार को कोल्टा आने वाली बारात को भी यह दूरी तय करनी पड़ेगी।
ग्रामीणों ने बताया कि कोल्टा निवासी कुंवर सिंह की पुत्री हिना की शुक्रवार को हिंडोलाखाल से बारात आनी है। अभी तक इस क्षेत्र से आने वाली बारातें पैदल पुल से गांव पहुंच जाती थी, लेकिन पुल न बनने व ट्राली के बार बार खराब होने से बारात को कीर्तिनगर-खंदूखाल-रामपुर मोटर मार्ग से 50 किमी फेरा लगाकर आना पड़ेगा।
कुंवर सिंह ने कहा कि पुल नहीं होने से शादी का सामान भी उन्हें बगवान से वाहन बुक करके गांव पहुंचाना पड़ा। रिश्तेदारों को भी गांव तक पहुंचने के लिए दिक्कत उठानी पड़ेगी।
ट्राली के रस्से का नट खुल गया था। नट को दोबार लगा दिया गया है। सोमवार तक ट्राली की रिंच बनकर आ जाएगी। रिंच लगने के बाद ट्राली मशीन से चलेगी।
-सुरेश कुमार तोमर, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग