- एमबीपीजी कॉलेज में छात्र और छात्राओं का हॉस्टल न होना
- खेल का मैदान न होना
- विद्यार्थियों की संख्या की तुलना में संसाधनों की कमी
-ऑफिस रिकार्ड का उचित प्रबंध न होना
- नैक की टीम ने करीब चार छात्रों के पास कालेज के बारे में फीड बैक लेने के लिए मेल भेजी गई थी, उस पर रिस्पांस ने आना।
मुझे कोई नहीं जानकारी: डॉ. खंडूरी
प्राचार्य डॉ बीना खंडूरी का कहना है कि नैक के निरीक्षण में कॉलेज को कौन सी ग्रेडिंग मिली है, मुझे अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है। वहीं, नैक के निरीक्षण के दौरान प्राचार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. जीएस बिष्ट का कहना है कि कॉलेज को ए ग्रेड मिले, इसके लिए हर संभव प्रयास किए गए थे पर अफसोस है कि अपेक्षित परिणाम नहीं आया।
लाखों रुपये खर्च किए गए
नैक के निरीक्षण को लेकर के कॉलेज प्रशासन की ओर से परिसर में साज सज्जा कार्य और रंग रोगन समेत कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने को लेकर दस लाख अधिक का खर्च किया गया। साथ ही क्लासरूम को स्मार्ट बनाने समेत अन्य कार्यों के लिए डीपीआर उच्च शिक्षा निदेशालय को काफी समय पहले भेजी थी लेकिन निदेशालय से डीपीआर पर फैसला नहीं हो सका। उच्च शिक्षा निदेशालय और शासन का अपेक्षित सहयोग न मिलना भी एक कारण माना जा रहा है।