चीन और नेपाल की सीमा से सटे धारचूला विधानसभा क्षेत्र की चौदांस घाटी के 14 गांवों में कोई भी लोकसभा प्रत्याशी वोट मांगने नहीं पहुंचा।
अमर उजाला ने कंज्योति से रूंग तक करीब 30 किमी की एकतरफा पैदल यात्रा कर चुनावी माहौल में चौदांस घाटी के हालात का जायजा लिया।
पता चला कि चौदांस घाटी के हिमखोला पोलिंग बूथ में 400 से अधिक मतदाता हैं, लेकिन इस क्षेत्र में लोकसभा चुनाव की कोई हलचल नहीं है।
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सेवा से वंचित सीमांत के लोग आज भी उपेक्षा के दंश झेल रहे हैं। युवाओं के पलायन के चलते कई गांवों में सिर्फ महिलाएं और बुजुर्ग रह गए हैं।
पुल न बनने से 15 किमी पैदल रास्ता
धारचूला से 30 किमी का वाहन से सफर तय कर कंज्योति पहुंचा। कंज्योति में आपदा के बाद से पुल न बनने से आगे यातायात बंद है।
कंज्योति से 15 किमी की कठिन पैदल दूरी पर हिमखोला गांव में चुनाव की कोई हलचल नहीं दिखी। हिमखोला के पूर्व प्रधान उमेद सिंह आपदा में बहे पुल के स्थान पर नया पुल न बनने पर रोष व्यक्त करते हुए कहते हैं कि नारायण आश्रम में पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती थी तो स्थानीय लोग वहां दुकान, होटल चलाते थे।
घोड़े, खच्चरों से लोगों को रोजगार मिलता था। रोजमर्रा का सामान भी मिल जाता था। जून की आपदा के बाद इलाका शेष दुनिया से कट गया है।
नेपाल से भी खराब हैं हालात
जून की आपदा के बाद इलाके के लोगों को 70 रुपये किलो नमक खरीदना पड़ा था। अब भी सामान की ढुलाई अधिक पड़ने से राशन, तेल आदि सामान काफी महंगा मिल रहा है।
कहते हैं अधिकारी गांव में आते नहीं हैं, नेताओं की तो बात ही दूर है। गांव की ही कमला देवी कहती हैं कि हम लोगों को संचार सुविधा भी सरकार नहीं दे रही है, जबकि नेपाल में संचार सुविधा उपलब्ध है।
पूर्णिमा देवी कहती हैं कि सड़क यातायात ठप होने से चौदांस का प्रसिद्घ आलू और लाल राजमा बाजार नहीं पहुंच पा रहा है।
हिमखोला से 5 किमी चलकर नारायण आश्रम पहुंचे। इसके बाद 3 किमी पैदल चलकर सोसा पहुंचे तो यहां हालात और विकट दिखे।
गांव में अब केवल बूढ़े और महिलाएं
सड़क विहीन सोसा के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य खुशाल गर्खाल ने बताया कि स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा सुविधा न होने से गांव से लगातार पलायन हो रहा है।
गांव में 50 परिवार रहते हैं। पढ़ने वाले बच्चों के साथ ही युवा धारचूला, पिथौरागढ़ या अन्य जगह रहते हैं। गांव में बूढ़े और महिलाएं ही बची हैं।
सड़क आदि सुविधाओं के लिए गांव के लोगों ने कई आंदोलन किए। सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने इन गांवों का दौरा किया, लेकिन हालात में कोई अंतर नहीं आया।
7 किमी दूर पांगला से घोड़े, खच्चर में सामान लाना पड़ता है। सरकार हर परिवार में शौचालय की बात करती है। गांव में मात्र तीन शौचालय बने हैं। 250 परिवार वाले सिर्दांग में 50 परिवार पलायन कर चुके हैं, अब सिर्फ 200 परिवार ही बचे हैं।
खूबसूरत इलाका पर्यटकों की पहुंच से बाहर
सिर्दांग के पास में स्थित रूंग गांव की उर्मिला देवी कहती हैं कि इतने खूबसूरत इलाके का पर्यटकों की पहुंच से बाहर होना सरकार के पर्यटन विकास की हवाई बातों को जमीन पर ले आती है।
काफी कम होता है मतदान
चौदांस घाटी के हिमखोला पोलिंग बूथ में 400 से अधिक मतदाता हैं। पलायन के कारण गत विधानसभा चुनाव में 140 लोगों ने ही मतदान किया।
सोसा के 445 मतदाताओं में से 2012 में से 127 लोग और सिर्दांग के 375 वोटरों में से 131 ने ही मतदान किया।