दोपहर के 2 बजे थे। कुछ मुसलिम बहुल गांवों का चुनावी नजारा देखने अमर उजाला सहसपुर पहुंचा।
तिराहे से दाईं तरफ पतली सी सड़क पर मुश्किल से सौ मीटर अंदर जाते ही तिलिस्मी अंदाज में कस्बाई चमक-दमक खांटी गांव में बदल गई। कच्चे मकानों की दीवारों पर गोबर के कंडे और हैंडपंपों का सूखा मुंह हालात बताने लगे।
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छतों की मुंडेरों पर झंडे-बैनर नहीं थे। चुनावी हलचल की कोई निशानदेही न होती थी। विकास के तमाम निशान यहां से गायब हैं। दो किमी तक अंदर जाने पर जंगल आ गया तो वहीं से लौट पड़े।
वापसी में मोहम्मद यूसुफ और उनकी पत्नी नजमा खेतों में सूखी गेहूं की बालियों को हटाते रास्ते पर आ गए थे। इनका घर बाढ़ में बह गया था। विकास के बारे में पूछते ही फट से पड़े। बोले कि योजनाएं दफ्तरों तक ही रहती हैं।
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गांव में नहीं उतर पातीं। किसी घर में शौचालय नहीं है। अफसर-नेता सब खा जाते हैं। हैंडपंप खराब हैं, बनते ही नहीं। वोट का जिक्र हुआ तो बोले कि किसी न किसी को तो वोट देंगे जरूर।
किराने के दुकानदार अनिल कुमार न बताया कि क्षेत्र में कोई प्रत्याशी और नेता नहीं आता। मतदान के दिन वोट देने चले जाएंगे। यहां से घूमते हुए बगल के ढाकी पहुंचे। रोजमर्रा की तरह लड़के चबूतरे पर बैठे लूडो खेल रहे थे।
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सहसपुर जैसी हालत यहां भी थी। न किसी दल का झंडा, न बैनर। रास्ते में ग्राम प्रधान अब्दुल सत्तार का घर मिला। पूछा तो बोले कि सांसद यहां नहीं आतीं। सारा काम विधायक से ही पड़ता है।
गांव में जिनका मतदाता पहचान पत्र बना है सभी वोट डालते हैं। इसके बाद लक्ष्मीपुर, रामपुर होते हुए शंकरपुर पहुंचे। कहीं भी लोकसभा चुनाव प्रचार होते नहीं दिखा।
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कोई घर के बाहर मोबाइल पर फेसबुक देख रहा था तो कोई कैरम और लूडो खेलता मिला। तपिश में शंकरपुर की गलियों में सन्नाटा पसरा था।
दूर तक एक भी चुनावी झंडा नजर नहीं आता। ज्यादातर लोग काम पर गए थे या घरों में थे। सामने के घर से किसी काम से निकलीं महिलाओं से चुनाव के बाबत पूछा तो ‘हमें नहीं पता’ कहकर वह आगे बढ़ गईं।
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चार छोटे बच्चे नाली में कंकड़ी फेंक रहे थे। मसजिद से नमाज पढ़कर निकले अमजद से चुनाव के बारे में पूछा तो बोले कि यहां नेता कोई आता नहीं। शोर नहीं होता, वोट सभी डालते हैं।
आखिर में ग्राम प्रधान इरशाद अहमद के घर पहुंचे तो वह आराम कर रहे थे। पूछा तो बोले-लोकसभा चुनाव में हो-हल्ला नहीं होता। मतदान के दिन लोग अपना वोट दे देंगे।
सहसपुर
वोटर- 5 हजार
आबादी- 15 हजार
पिछले लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत- 35 फीसदी
प्रधान- सुंदर थापा
पार्टी- वामदल
मुसलिम आबादी- 55 फीसदी
ढाकी
वोटर- 2200
आबादी- करीब साढ़े चार हजार
पिछले चुनाव में 60 फीसदी वोट पड़ा
ग्राम प्रधान- अब्दुल सत्तार
पार्टी- भाजपा
मुसलिम आबादी- 83 फीसदी
लक्ष्मीपुर
वोटर- 2200
आबादी- साढ़े चार हजार
पिछले चुनाव में वोट पड़े- 65 फीसदी
ग्राम प्रधान- इजहार अहमद
पार्टी- कांग्रेस
मुसलिम आबादी- 80 फीसदी
रामपुर
वोटर- 2400
आबादी- साढ़े चार हजार
पिछले चुनाव में वोट पड़े- 70 फीसदी
ग्राम प्रधान- सईदा परबीन
पार्टी- कांग्रेस
मुसलिम आबादी- 90 फीसदी
शंकरपुर
वोटर- 5000
आबादी- 14 हजार
पिछले चुनाव में वोट पड़े- 65 फीसदी
ग्राम प्रधान- इरशाद अहमद
पार्टी- भाजपा
मुसलिम आबादी- 55 फीसदी
इन गांवों के मुद्दे
- घरों में शौचालय नहीं
- हैंडपंपों की कमी
- कन्या पाठशालाओं की जरूरत
- स्कूलों में शिक्षकों की कमी
- सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं
- टूटी सड़कें