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विश्व में फहराएंगे संस्कृत का ध्वज: अजीज कुरैशी

Sun, 28 Sep 2014 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती
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देहरादून राजभवन में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में शामिल देश-विदेश के विद्वानों ने शनिवार शाम परमार्थ निकेतन की सांध्यकालीन गंगा आरती में प्रतिभाग किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि राज्यपाल अजीज कुरैशी ने कहा कि हमारा देश संस्कृति का देश है।
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परमार्थ निकेतन के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज ने राज्यपाल को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत रही है।

इतिहास गवाह है कि तमाम विदेशी दार्शनिकों ने संस्कृत भाषा की बदौलत ही प्रसिद्धि हासिल की है। उन्होंने संस्कृत को देश ही नहीं विश्व फलक पर बढ़ाने का संकल्प लिया।
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शिक्षा मंत्री ने की तारीफ
शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने राज्यपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल संस्कृत भाषा को आगे बढ़ाने के लिए महती प्रयासों में जुटे हैं। यह राज्य के लिए गौरव का विषय है।

कहा कि सरकारी स्तर पर विश्व स्तरीय संस्कृत सम्मेलनों के आयोजन में निरंतरता लाई जाएगी जिससे भाषा को जन जन तक पहुंचाया जा सके।

18 देशों के विद्वानों ने की गंगा आरती
इस दौरान भारत समेत विश्व के 18 देशों से आए संस्कृत विद्वानों ने गंगा आरती में भाग लिया। इनमें चीन, अमेरिका, नेपाल, बंग्लादेश, इंडोनेशिया, जापान, स्पेन, बेल्जियम, भूटान, थाइलैंड के संस्कृतज्ञ शामिल हैं। इस अवसर पर गंगा घाट पर भजन संध्या और संस्कृत काव्य पाठ का आयोजन किया गया।

मौके पर अपर मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव संस्कृत शिक्षा के एस. राजू, सचिव राज्यपाल अरुण ढौंडियाल, राज्यपाल के प्रभारी सचिव डा. निधि पांडेय, अपर सचिव संस्कृत शिक्षा विनोद रतूड़ी, उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल, डीएम चंद्रशेखर भट्ट आदि मौजूद थे।
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