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सरकार को महंगी पड़ गई केदारनाथ पूजा

Wed, 11 Sep 2013 10:06 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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व्यापक पैमाने पर मानव संसाधन झोकने के बाद ही बुधवार को केदारनाथ में पूजा संभव हो सकी। हर रोज जो लोग केदारनाथ में जुटे उन पर बड़ी धनराशि खर्च हुई।
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डीआईजी जीएस मर्तोलिया एक अपर पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर और 22 सिविल पुलिस के कर्मियों व 16 एनडीआरएफ के जवानों के साथ लगातार केदारनाथ परिसर में शवों को निकालने का काम करते रहे।

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156 शव निकाले
भवन तोड़े गए, लकड़ी के ढेर हटाए गए और 156 शव निकाले। सिविल पुलिस व एनडीआरएफ के जवानों व उप-निरीक्षकों के औसत वेतन के हिसाब से एक जवान का एक दिन का वेतन 800 रुपए और डीए 300 रुपए बैठता है।
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इस तरह से एक जवान पर औसतन एक दिन में 1100 रुपए खर्च हुए। इसमें आने जाने व रहने का खर्च शामिल नहीं है। 38 कर्मियों का एक दिन का वेतन 41800 रुपए हुआ।

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दिन का खर्च पचास हजार
डीआईजी व एडिशनल एसपी भी जोड़ ले तो एक दिन का इन सभी का खर्च पचास हजार रुपए के आस पास बैठता है। केदानाथ मंदिर परिसर में यह टीम 14 दिन रही।

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इस तरह से 14 दिन का वेतन संबंधी खर्च ही 585200 रुपए हुआ। इस टीम ने कई कई दिन कैंप कर अलग अलग क्षेत्रों गरुड़चट्टी, देव विष्णु, गोंकारा आदि स्थानों पर काम किया।

इसके अलावा मंदिर समिति के लगभग 20 कर्मी पिछले एक महीने से कार्यरत रहे। दो लाख रुपए से ज्यादा वेतन पर और अन्य खर्च भी हुआ।

एयरफोर्स व प्राइवेट पर लगभग एक करोड़ खर्च
केदारनाथ के पुनर्निर्माण के लिए अपना एयरफोर्स का एक एमआई 26 हेलीकाप्टर भारी मशीनों को उठाने के लिए मुहैया करवाया है। जिसकी तीन उड़ाने भी हुई, लेकिन उसके खड़े रहने का भी लाखों रुपये का बिल राज्य सरकार को वहन करना पड़ेगा। इसके अलावा प्राइवेट हेलीकाप्टरों की नियमित उड़ाने इस दौरान रुद्रप्रयाग से केदारनाथ के बीच उड़ी हैं। हेलीकाप्टर उड़ानों पर लगभग एक करोड़ से अधिक का बिल बैठेगा।
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पांच डाक्टरों की थी टीम
केदारनाथ में चले राहत अभियान में स्वास्थ्य विभाग के गुप्तकाशी में पांच डाक्टरों का कैंप था, जिसमें एक की ड्यूटी केदारनाथ में डीएनए सैंपलिंग के लिए रहती थी। केदारनाथ को पूजा योग्य बनाने के लिए इस्तेमाल हुई सरकारी मशीनरी में डाक्टरों का वेतन जोड़ा जाए तो करीब चार लाख रुपये जोड़े जा सकते हैं।
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