2016-17 का बजट भले ही राजस्व सरप्लस का हो पर राजस्व घाटे से बचने की चुनौती प्रदेश सरकार के सामने बरकरार है। 2014-15 के वास्तविक आंकड़ों से यह साबित भी हो रहा है।
2014-15 के बजट में प्रदेश सरकार ने 682.43 करोड़ रुपये के राजस्व सरप्लस का अनुमान लगाया था, जब वास्तविक आंकड़े सामने आए तो प्रदेश सरकार को 637.80 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा उठाना पड़ा था।
राजकोषीय घाटा भी 4075 करोड़ रुपये रहने का अनुमान था, जो वास्तविक रूप से 5696 करोड़ रुपये के रूप में सामने आया।
प्रदेश में राजस्व सरप्लस और कोई नया कर न लगाने का बजट पेश करने की परंपरा सी बन गई है।
इस बार बना 25 करोड़ राजस्व सरप्लस का बजटः
आर्थिक मोर्चे पर तमाम दबाव सहन करने के बाद भी वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने इस बार भी इस परंपरा को निभाया। वर्ष 2016-17 का बजट बमुश्किल 25 करोड़ राजस्व सरप्लस का बजट बन पाया है। इसमें भी प्रदेश सरकार ने अपने कर राजस्व में करीब 17 प्रतिशत के कर इजाफे का अनुमान लगाया है।
2014-15 के वास्तविक आंकड़ों के सामने आने पर यह भी साबित हुआ कि राजस्व का अनुमान बुरी तरह से धराशायी हुआ। करेत्तर राजस्व में करीब 1110 करोड़ रुपये ही मिल पाए, जबकि अनुमान 1807 करोड़ रुपये का था।