एक पार्टी की जिला मुखिया बहुत दिन से परेशान रही हैं। बीपी बढ़ा तो उन्हें लगा कि किसी ने जादू-टोना कर दिया है। बहुत दिनों तक इधर-उधर परेशान थीं।
कई धर्मगुरुओं के पास गईं मेडम
तब तक हाईकमान से कई कार्यक्रम आ गए। उनकी शंका और बढ़ गई कि कहीं दल के ही विपक्षी नेता उनका ग्राफ नीचे न करवा दें। इस चक्कर में वह कई धर्मगुरुओं के पास गईं। उनकी बातचीत से जब वे संतुष्ट न हुईं तो खुद ही कुछ करने का विचार करने लगीं।
उनकी सहेली ने राय दी कि वह खुद ही सिद्धि कर लें। इससे हमेशा पावर उनके पास ही रहेगा। इधर-उधर कहीं भटकना नहीं पड़ेगा। इस चक्कर में वह पश्चिम बंगाल चली गईं। वहां से 15 दिन बाद लौटीं तो आत्म विश्वास से भरी थीं।
बोलीं कि 10 दिन तक तपस्या की। अब ठीक है। अगर वहां न जाते तो बड़ा नुकसान हो जाता। पश्चिम बंगाल से लौटने के बाद उन्होंने संगठन की कमान कसनी शुरू कर दी। कामधाम में जरा सा बहकने वाले नेताओं को टाइट करना शुरू कर दिया।
इससे उनके सचिव बहुत परेशान हैं। कहते हैं कि लगता है आत्म रक्षा के लिए अब उन्हें भी सिद्धि करने पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा दीदी बहुत आक्रामक हो गई हैं।