12 सूत्री मांगों को लेकर जीएमवीएन कर्मियों का आंदोलन सोमवार को सातवें दिन भी जारी रहा। धरना प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि कार्मिक पहले में भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों को लेकर उदासीन बनी हुई है।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना के कारण दोनों जीएमवीएन और केएमवीएन दोनों को नुकसान पहुंचा है। इसलिए कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों के देयक के लिए 50-50 लाख रुपये का भुगतान होना चाहिए। उन्होंने दोनों निगमों को उत्तराखंड पर्यटन परिषद में समायोजित करने की मांग की।
उन्होंने दोनों निगमों को रोजगारपरक व आत्मनिर्भर बनाने के लिए एफएलटू, खनन और पर्यटन के निर्माण संबंधी कार्य देने की मांग की। उन्होंने कहा कि निगम में नियमित हुए कर्मचारियों को उनकी पुरानी सेवा का लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने किसी भी आवास गृह व इकाई को निजी क्षेत्र को न देने, जीएमवीएन व केएमवीएन कर्मचारियों की व्यक्तिगत समस्याओं के साथ दोनों निगमों के कर्मचारी संगठनों की समय-समय पर दी गई लंबित मांगों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की।
धरना प्रदर्शन करने वालों में सुरेंद्र लाल, ओमप्रकाश भट्ट, भाव सिंह, नरेंद्र नाथ, राजेंद्र सिंह रावत, राकेश राणा, राजेश जुयाल, गंभीर सिंह, हनुमंत सिंह रावत, महावीर सिंह रावत, प्रताप सिंह नेगी, गणेंद्र सिंह चौहान, बद्री प्रसाद ममगाई, राजेंद्र रतूड़ी, दिनेश सिंह गुसाईं, सोबन सिंह परमार, सुरेश सिंह पंवार, उमेश चंद्र कोठियाल, बुद्धि सिंह ज्याड़ा, धनवीर सिंह राणा, दिनेश पंवार समेत अन्य शामिल रहे।