काम मुश्किल था, लेकिन गबर का हौसला ज्यादा मजबूत था। उन्होंने बगैर सरकारी सहायता के अकेले के दम पर दो किलोमीटर पहाड़ काट डाला। दो किमी सड़क को जेसीबी से काटने में करीब डेढ़ महीने का समय लग गया। गांव में वाहन पहुंचा तो लोग खुशी से झूम उठे। लोगों का कहना है कि जो सरकारी सिस्टम नहीं कर पाया वह गबर ने कर दिखाया। अब छोटे वाहन आसानी से गांव तक पहुंच सकते हैं।
लंबे समय से परेशान थे लोग
विकासखंड के फुवाण गांव के 45 परिवार लंबे समय से गांव को सड़क से जोड़ने की मांग कर रहे थे। आज तक न तो शासन प्रशासन ने ग्रामीणों की बात सुनी और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने। किसी व्यक्ति के बीमार होने पर लोग उसे घोड़े खच्चर और चारपाई के सहारे सड़क तक पहुंचाते थे। इसी पीड़ा को दूर करने का संकल्प गबर ने लिया था।
अगर गांव के एक युवक ने अपने प्रयासों से सड़क निर्माण किया है तो यह सराहनीय है। युवक का पता लगाकर उसका सम्मान किया जाएगा। अब तक सड़क क्यों नहीं बन पाई या इसका प्रस्ताव लंबित होने के संबंध में जानकारी नहीं है।
- मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी