लालकुआं में ट्रेन की चपेट में आकर दो हाथियों की दुखद मौत के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी हाथियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं। टाइगर रिजर्व निदेशक की ओर से नए सिरे से एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें हाथियों की सुरक्षा को लेकर हर संभव कदम उठाने की बात कही गई है।
टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह ने अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों को हिदायत दी है कि वे यह सुनिश्चित कराएं कि हाथी किसी भी सूरत में रेलवे लाइनों के आसपास न आने पाए। हाथियों को रेलवे लाइन के पास आने से रोकने को लेकर डोईवाला से लेकर मोतीचूर हरिद्वार तक पटरियों के आसपास गश्त तेज करने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
टाइगर रिजर्व के उन क्षेत्रों में जहां हाथी प्राय: रेलवे लाइनों की तरफ आ जाते हैं वहां चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी की बात कही गई है। इतना ही नहीं टाइगर रिजर्व निदेशक ने रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखकर इस बात का भी अनुरोध किया है कि देहरादून से हरिद्वार के बीच ट्रेनों को निर्धारित गति सीमा में ही संचालित किया जाए। ताकि, हाथियों के साथ किसी प्रकार का हादसा ना हो।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो दशक के भीतर राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 35 से अधिक हाथी ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। हाथियों के साथ ट्रेन से होने वाले हादसों को रोका जा सके, इसे लेकर रेलवे और टाइगर रिजर्व प्रशासन के अधिकारियों के बीच न सिर्फ कई दौर की वार्ता हो चुकी है, वरन कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने को लेकर समझौते भी हुए हैं। इसमें देहरादून से हरिद्वार तक ट्रेनों को अधिकतम 35 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाए जाने का प्रावधान शामिल है।