अगर आप दून में प्लॉट खरीद रहे हैं तो एमडीडीए से इन बातों की जानकारी जरूर ले लें वरना इन्हीं की तरह परेशानी उठानी पड़ेगी।
केस-एक
नेहरू कॉलोनी निवासी सुनील पांथरी ने एक साल पहले शिमला बाईपास से लगे इलाके में एक प्लॉट खरीदा। कॉलोनाइजर ने उसे हर तरह की सुविधा देने का दावा किया। जब सुनील ने उस जमीन पर मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने को एमडीडीए में दिया, तो अप्रूव्ड कॉलोनी न होने का हवाला देते हुए उसका नक्शा रोक दिया गया। अब सुनील उस जमीन को बेचकर दूसरी जगह लेने की सोच रहा है।
केस-दो
सहस्त्रधारा रोड निवासी विक्रम पुंज ने मसूरी रिंग रोड बाईपास से लगे क्षेत्र में प्लॉट लिया। उसने मकान बनाने के लिए नक्शा बनवाया तो एमडीडीए ने रोड की चौड़ाई कम होने की बात कहते हुए पास करने से इंकार कर दिया। जिस आदमी ने प्लॉट बेचा वह विदेश जा चुका है। विक्रम को जमीन का बड़ा हिस्सा सड़क के लिए काटना पड़ रहा है।
ऊपर दिए गए दोनों मामले केवल बानगी भर हैं। बिना जानकारी के प्लॉट खरीदने वाले सैकड़ों लोग इन दिनों एमडीडीए के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जमीन बेचने वाला प्रॉपर्टी डीलर या कालोनाइजर लोगों को अंधेरे में रखकर जमीन बेच देता है। इसके बाद परेशान लोगों को नक्शा पास करवाने, जमीन का लैंड यूज चेंज कराने और अन्य औपचारिकताओं के लिए एमडीडीए के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
एमडीडीए में बड़ी संख्या में ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मामले नया मास्टर प्लान लागू होने से पहले खरीदी गई जमीनों के हैं। नए मास्टर प्लान के अनुसार जमीनों का लैंड यूज, सड़क व अन्य मानकों में खासा बदलाव हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों ने पहले जमीन खरीदी अब जब वह नक्शा पास करवाने पहुंच रहे हैं, तो उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।