गोरखा शासनकाल में बाऊलकी गढ़ और ब्रिटिश शासन में लंदनफोर्ट नाम से प्रसिद्ध किला पिथौरागढ़ में स्थित है। इस किले में अब संग्रहालय की स्थापना की जाएगी।
राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की भी मांग
इस संग्रहालय में विशेष रूप से पिथौरागढ़ का इतिहास संजोने की योजना है। 17वीं सदी में बने इस ऐतिहासिक किले को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की भी मांग लंबे समय से की जा रही है।
किले से दिखता है पिथौरागढ़ का सुदंर नजारा
पर्यटन विभाग ने 2013 से संचालित पर्यटन अवसंरचना विकास निवेश कार्यक्रम के तहत किले के विकास की योजना तैयार की है। राज्य का पर्यटन महकमा एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की वित्तीय मदद से किले का जीर्णोद्धार करेगा।
गोरखा शासनकाल (1790-1815) में सत्ता के केंद्र रहे इस किले में ब्रिटिश काल (1881) से तहसील कार्यालय चल रहा है। 6.5 नाली भूमि में बने किले की दीवारों में बंदूकें चलाने के लिए 152 छिद्र बने हैं। किले की दीवारों की लंबाई 88.5 मीटर है।
किले में एक मुख्य भवन समेत तमाम भवन हैं। शहर के मध्य में स्थित इस किले से पिथौरागढ़ के चारों ओर का नजारा देखते ही बनता है।
कुमाऊं पर अधिकार जमाने के बाद बदला नाम
पिथौरागढ़ के इतिहास पर पुस्तक लिख चुके राजेश मोहन उप्रेती बताते हैं कि कुमाऊं पर अधिकार जमाने के बाद वर्ष 1815 में अंग्रेज अफसर ई गार्डनर के नेतृत्व में अंग्रेजों ने पिथौरागढ़ पर भी कब्जा कर लिया और किले का नाम बाऊलकीगढ़ से बदलकर लंदन फोर्ट रख लिया था।
पर्यटन विभाग की योजना को देखते हुए पिथौरागढ़ के किले से तहसील कार्यालय को शिफ्ट किया जाना है।
तहसीलदार एलएम भट्ट ने बताया कि नए तहसील परिसर के लिए राजस्व विभाग ने 6.5 नाली जमीन का हस्तांतरण कर लिया है।
कुमाऊं शिल्प, कला और संस्कृति केंद्र भी बनेगा
पर्यटन विभाग के समूह विकास अधिकारी डॉ. जगत सौंटियाल ने बताया कि जीर्णोंद्धार के बाद किले में स्थानीय इतिहास संग्रहालय के साथ ही हेरिटेज गेस्ट हाउस, पर्यटन सूचना केंद्र, स्थानीय उत्पाद विक्रय केंद्र, कुमाऊं शिल्प कला और संस्कृति केंद्र की स्थापना की योजना है। किले में पुख्ता प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी।
शोभा बढ़ाएंगे ताम्रपत्र, प्राचीन सिक्के
पर्यटन विभाग के समूह विकास अधिकारी डॉ. जगत सौंटियाल का कहना है कि किले में स्थापित होने वाले संग्रहालय में जिले के इतिहास की जानकारी देने वाले ताम्रपत्र, प्राचीन सिक्के, हस्तलिखित पुस्तकें, शिलालेख रखे जाएंगे। किले से संबंधित जानकारी भी संग्रहालय में मिलेगी।