उन्होंने कहा कि वह क्यों आएंगे, मैं अगर बीमार हूं तो दवा लेने भी मैं खुद आऊंगा। जहां दवा होती है, वहां बीमार को जाना ही पड़ता है। इसलिए मैं खुद दवा लेने सतपाल महाराज के पास गया था। हरीश ने कहा कि इसके कोई सियासी मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। वह महाराज का एक आध्यात्मिक पुरुष के नाते हमेशा से सम्मान करते हैं। राजनीति अपनी जगह है और व्यवहारिक संबंध अपनी जगह। महाराज खाना खाने-खिलाने के शौकिन हैं, इसलिए उन्होंने बिना खाना खिलाए आने भी नहीं दिया।
हरीश से मिल चुके कई भाजपा नेता
पिछले कुछ दिनों से तमाम भाजपा नेता हरीश रावत के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात कर चुके हैं। पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फिर विधानसभा अध्यक्ष रितु भूषण खंडूरी। इसके बाद भाजपा की दो महिला विधायक सरिता आर्य और शैला रानी रावत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश से मिल चुकी हैं।
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भाजपाइयों में हरीश रावत से मिलने की इस होड़ से सियासी हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि राजनीतिक और वैचारिक रूप से ये विरोधी आए दिन पूर्व सीएम के घर आखिर क्यों दस्तक दे रहे हैं? इसके बाद शुक्रवार को सतपाल महाराज से मुलाकात ने चर्चाओं के बाजार को और गर्म कर दिया। कहा यह भी जा रहा है कि जितने भाजपाई जीतने के बाद हरीश से मिल चुके हैं, उतने कांग्रेसी विधायक भी अब तक हरीश के घर नहीं पहुंचे हैं।