कॉमर्शियल लाइसेंस के फर्जीवाड़े में सरकारी सुस्ती बड़ी जिम्मेदार है। देहरादून और पौड़ी संभाग में चालकों को प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों की मान्यता जून 2013 से रिन्यू नहीं की गई है।
इससे इन दोनों संभागों से जुड़े 11 प्रभागीय कार्यालयों का दबाव दून के झाझरा स्थित एकमात्र प्रशिक्षण संस्थान पर आ गया है। परिवहन कार्यालयों के प्रस्तावों पर भी जब शासन ने ध्यान नहीं दिया तो दलालों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया।
समय बचाने के फेर में लाइसेंस आवेदक भी उनके चक्कर में फंसते गए, नतीजतन सैकड़ों फर्जी लाइसेंस जारी कर दिए गए।
यह था संस्थानों का काम
परिवहन मुख्यालय ने हर जिले में कुछ ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी करने का लाइसेंस दिया था। ये संस्थान चालकों को दो माह का क्रैश कोर्स कराने के बाद सर्टिफिकेट देते थे। यह सर्टिफिकेट दिखाने पर आरटीओ से लाइसेंस जारी होता था।
यह है परेशानी
झाझरा को छोड़ बाकी निजी संस्थानों से प्रमाणपत्र जारी न होना पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली जिले के चालकों पर भारी पड़ रहा है। उन्हें प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के लिए देहरादून के चक्कर काटने पड़ते हैं। उस पर भी झाझरा संस्थान में भारी दबाव के चलते नंबर कब आएगा यह मालूम नहीं होता।
दलालों ने दिया झांसा
दलालों ने पर्वतीय क्षेत्रों और दून के ऐसे चालकों को झांसे में लिया, जो झाझरा स्थित संस्थान में वक्त की कमी के चलते नहीं जाना चाहते थे। दस से बीस हजार रुपये वसूलकर दलालों ने संस्थान का फर्जी प्रमाणपत्र इन लोगों को सौंप दिया। खास बात यह रही कि फर्जी प्रमाणपत्र पर ही सैकड़ों लाइसेंस जारी होते गए।
ये हैं संभागीय कार्यालय
देहरादून: दून शहर, हरिद्वार, विकासनगर, रुड़की, टिहरी, ऋषिकेश और उत्तरकाशी प्रभाग
पौड़ी: चमोली, रुद्रप्रयाग, कोटद्वार और पौड़ी प्रभाग
परिवहन मुख्यालय से किसी प्रशिक्षण संस्थान को लाइसेंस देने की अवधि छह माह होती है। लाइसेंस खत्म होते ही संबंधित क्षेत्र के एआरटीओ मुख्यालय को संस्थान के संसाधनों और प्रशिक्षकों के बारे में रिपोर्ट भेजते हैं, जिसके बाद लाइसेंस रिन्यू होता है। बीस जून 2013 को सभी एआरटीओ ने अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद संस्थानों की रिपोर्ट दे दी थी, लेकिन ये अब तक रिन्यू नहीं हुए हैं। मुख्यालय को फिर पत्र भेजकर संस्थानों को मान्यता देने की मांग की गई है।
- दिनेश चंद्र पठोई, आरटीओ, देहरादून