प्रदेश में गांवों के पुनर्वास में जमीन की समस्या आड़े नहीं आएगी। इसके लिए जरूरत के हिसाब से वन भूमि दी जाएगी, भले ही यह रिजर्व फारेस्ट की ही क्यों न हों।
यह बात केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंती नटराजन ने बुधवार को यहां कही। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों को बनाने के लिए केंद्र वन अधिनियम में ढील देने को भी तैयार है। केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड की ग्रीन बोनस की मांग पर भी अपनी सहमति जताई।
सिविल सोयम की जमीन दी जाएगी
नटराजन ने कहा कि पुनर्वास के लिए पहले सिविल सोयम (ऐसी जमीन जो राजस्व रिकार्ड में वन क्षेत्र में है, लेकिन उस पर जंगल नहीं है) की जमीन दी जाएगी। विस्थापित होने वाले गांवों के आसपास ऐसी जमीन न होने पर वन पंचायतों के अधीन वाली भूमि देने पर विचार होगा। किन्हीं कारणों से यह भी संभव नहीं होगा तो संरक्षित वन क्षेत्र की जमीन देने में भी इनकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों के लिए भी वन अधिनियम में ढील देने को उनका मंत्रालय तैयार है। क्षतिग्रस्त सड़क के वैकल्पिक मार्ग के लिए अगर वन भूमि का प्रस्ताव मिलता है तो उसे तेजी से निस्तारित किया जाएगा। इसके लिए देहरादून में नोडल कार्यालय स्थापित कर नोडल अधिकारी की तैनाती की जाएगी।
अभी तक यह कार्य लखनऊ स्थित नोडल दफ्तर से किया जा रहा है। केंद्रीय वन राज्यमंत्री नटराजन ने प्रदेश की ग्रीन बोनस की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह बोनस उत्तराखंड की जरूरत है और यह प्रदेश को दिया जाना चाहिए।
सिल्ट निकालने का प्रस्ताव मांगा
राज्य सरकार ने जयंती नटराजन के सामने सिल्ट जमा होने से नदियों का तल उठने का मुद्दा उठाया। उन्हें बताया गया कि खनन की अनुमति न होने से नए क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो रहा है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने नदियों से सिल्ट निकालने की अनुमति का प्रस्ताव को जल्द केंद्र सरकार को भेजने को कहा।
सचिवालय में केंद्रीय मंत्री की सीएम, मंत्रियों और अफसरों की संयुक्त बैठक में निर्माण कार्य के लिए वन भूमि का उपयोग करने पर वर्तमान में दोगुनी भूमि पर वनीकरण करने की शर्त का भी उल्लेख हुआ। वार्ता के बाद अब कुल उपयोग में लाई भूमि केबराबर भूमि पर वनीकरण पर सहमति बन गई।
बैठक में सांसद सतपाल महाराज, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, दिनेश अग्रवाल, विधायक गणेश गोदियाल, शैलारानी रावत, पूर्व मंत्री नवप्रभात, प्रमुख सचिव एसएस संधु, एम रामास्वामी, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष एमसी बधानी, प्रमुख वन संरक्षक आरबीएस रावत सहित केंद्र और राज्य सरकार के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
ईको सेंसिटिव जोन पर बाद में बात
जयंती नटराजन ने ईको सेंसिटिव जोन पर कहा कि इस समय आपदा पर सबका ध्यान केंद्रित है। ईको जोन पर इसके बाद बात की जाएगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्र ने उत्तरकाशी जिले में ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया था। प्रदेश सरकार इसका विरोध कर रही है।
क्या है ग्रीन बोनस
सरकार के मुताबिक राज्य के भूभाग का 63 फीसदी हिस्सा वन क्षेत्र है। इसे बनाए रखने से प्रदेश को खासा नुकसान हो रहा है। वन क्षेत्र के आधे हिस्से भी कृषि और आर्थिक गतिविधियां हो सकें तो प्रदेश की आर्थिकी ही बदल जाएगी। इस वन क्षेत्र का बचाए रखने के एवज में ग्रीन बोनस की मांग की जा रही है। इस बार योजना आयोग के सामने भी प्रदेश सरकार ने दस हजार करोड़ रुपये के ग्रीन बोनस की मांग की है।