वनाग्नि की घटनाओं में छह लोगों की हो चुकी मौत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री को अधिकारियों की बैठक बुलाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को वनाग्नि की घटनाएं रोकने के आदेश देने पड़ रहे हैं। 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन से तीन मई तक प्रदेश में 1890 वनाग्नि की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कुल 3031.04 हेक्टेयर जंगल को नुकसान हो चुका है। इसमें 1329 हेक्टेयर आरक्षित वन भी शामिल है। कुल 79 लाख से अधिक की राजस्व की क्षति का आंकलन लगाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्ष में वनाग्नि की घटनाओं में छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 32 लोग घायल हो चुके हैं। इस फायर सीजन में केवल एक व्यक्ति की मौत हुई और छह लोग घायल हुए हैं।
जन भागीदारी से आग बुझाने पर जोर
जंगल की आग बुझाने के लिए प्रदेश सरकार का जोर संसाधनों को बढ़ाने के साथ जनता का सहयोग लेने पर भी है। इसके लिए सरकार ने हर ग्रामसभा स्तर पर वनाग्नि नियंत्रण प्रबंधन समिति के गठन का फैसला किया है। साथ ही वन पंचायतों को मनरेगा से जोड़ने की रणनीति बनाई है।
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पिछले छह वर्षों में वनाग्नि की घटनाएं और क्षति का लेखाजोखा
| वर्ष |
घटनाएं |
प्रभावित क्षेत्र |
मानव क्षति |
घायल |
| 2017 |
805 |
1244.64 |
00 |
01 |
| 2018 |
1498 |
4480.04 |
00 |
06 |
| 2019 |
1641 |
2981.55 |
01 |
15 |
| 2020 |
73 |
172.69 |
02 |
01 |
| 2021 |
2780 |
3927.83 |
02 |
03 |
| 2022 |
1890 |
3031.04 |
01 |
06 |
नोट : 2022 में तीन मई तक के आंकड़े
पिछले वर्ष की तुलना में अप्रैल माह तक वनाग्नि की कम घटनाएं हुई हैं। यह वन विभाग की पूर्व नियोजित कार्य योजना का नतीजा है। हम ग्रामीणों की मदद से वनाग्नि की घटनाओं को रोकने की प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।
- सुबोध उनियाल, वन मंत्री, उत्तराखंड