विस में बैकडोर भर्ती जांच की किस पर कितनी आंच
वर्ष 2012-17 और वर्ष 2017-2022 के बीच विधानसभा में हुई बैकडोर भर्ती की जांच शुरू हो चुकी है। सबकी निगाहें जांच समिति पर लगी है। जांच की आंच से कौन कितना तपता है। कठघरे में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस सरकारों के स्पीकर के फैसले हैं। तीसरे दिन समिति ने विस के अधिकारियों की पेशी लगाई और पूछताछ की।
भू कानून समिति की सिफारिशों से गरमा उठी सियासत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पहले कार्यकाल में राज्य में सशक्त भू कानून की मांग पर एक समिति गठित की थी। समिति अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप चुकी है और अब इस पर सियासत गरमा उठी है। सत्तारूढ़ भाजपा सिफारिशों को भू सुधार की दिशा में मील का पत्थर बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे सिरे से खारिज कर रहा है। सिफारिशों पर भाजपा और कांग्रेस के मध्य आरोप-प्रत्यारोप की जंग शुरू हो गई है।
महिलाओं का क्षैतिज आरक्षण बचाने की चुनौती
सरकारी नौकरियों में महिलाओं के 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर उच्च न्यायालय की रोक के बाद सरकार के सामने इसे बचाने की चुनौती है। सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का नीतिगत फैसला कर चुकी है। सचिव कार्मिक शैलेश बगौली के मुताबिक, कोर्ट में एसएलपी दायर करने तैयारी की जा रही है। उधर, कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है।
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राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण का मुद्दा भी गरम
राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का विधेयक पुनर्विचार के लिए लौटने के बाद अब इस मुद्दे पर भी सियासत गरम है। नया विधेयक लाने की मांग उठ रही है। सरकार दो विकल्पों पर काम कर रही है। पहला वह आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण को असांविधानिक करार देने वाले आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में नए सिरे से पैरवी करेगी। दूसरा, अध्यादेश लाने के विकल्प भी विचार शुरू हो गया है।