गैस सिलिंडरों में 80 फीसदी सब्सिडी मिले
संचालन कर रहे पर्वतीय विकास शोध केेंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि पहाड़ के लोगों को जंगलों की रक्षा के लिए रॉयल्टी मिलनी चाहिए। गैस सिलिंडरों में 80 फीसदी सब्सिडी मिलनी चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो जंगलों पर दबाव खत्म हो जाएगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास कार्य होने चाहिए लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं। परियोजनाओं का निर्माण सुनियोजित ढंग से पर्यावरण को ध्यान में रखकर होना चाहिए। हिमालय को बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। पहाड़वासियों को वनों को बचाने के लिए विशेष सुविधाएं मिलनी चाहिए। कार्यक्रम को विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं की शंकाओं का समाधान भी किया।
विशेषज्ञों के सुझाव
- व्यक्तिगत सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा पर प्रत्येक व्यक्ति को समाज पर्यावरण, जल, जंगल और जमीन जैसे विषयों के संरक्षण व संवर्धन के लिए आगे आकर अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए कार्य करना होगा। हिमालय को बचाने है तो हर शख्स को आगे आना होगा। -डॉ.जेपी भट्ट, समाजशात्री, गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर।
- बड़े बांधों के बजाय रन ऑफ द रीवर बांधों का निर्माण होना चाहिए। इससे विस्थापन की समस्या आड़े नहीं आएगी। टिहरी बांध परियोजना के लिए पेड़ों की बलि ली गई। इसके बदले पेड़ सैकड़ों किलोमीटर दूर झांसी में लगाए गए। पर्यावरण के प्रति संतुलन, सामंजस्य और जागरूकता होनी चाहिए। -समीर रतूड़ी, अध्यक्ष हिमालय बचाओ आंदोलन।
- रोजगार के नाम पर हिमालय क्षेत्र में किया जा रहा अतिक्रमण चिंता का विषय है। इसको रोका जाना चाहिए। व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण को बचाया जा सकता है। नदियों में जा रही गंदगी को हर हाल में रोकना होगा। पहाड़ों पर कूड़ा निस्तारण के लिए ठोस नीति तय की जानी जरूरी है। -डॉ. विजयकंात पुरोहित, वरिष्ठ वैज्ञानिक हेप्रेक श्रीनगर।
- जब तक हिमालय के लोगों की आवश्यकता की पूर्ति नहीं होगी तब तक पर्यावरण नहीं बच सकता। गांव खाली हो रहे हैं, शहरों का जनसंख्या घनत्व बढ़ रहा है। ग्राम पंचायतों को और अधिकारों के साथ जिम्मेदारी देनी होगी। आपदा और पर्यावरण नैतिकता राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में शामिल हो। -प्रो. एमएम सेमवाल, विभागाध्यक्ष राजनीतिशास्त्र गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर।
- ग्लेशियर हमारी लाइफ लाइन हैं। ब्लैक कार्बन से ग्लेशियरों को नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरण को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। कूड़ा जलाने पर अंकुश लगाना चाहिए। सरकारों को शोध के लिए बजट बढ़ाने के साथ ही वैज्ञानिकों की रिपोर्ट का भी पालन करना होगा। -डॉ. आलोक सागर गौतम, हिमालय के मौसम पर शोध कर रहे भौतिकशास्त्री।
हिमालय संकल्प
पॉलीटेक्नीक से शुरू होगा अभियान
हर साल पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे तो रोपे जाते हैं लेकिन पेड़ों के संरक्षण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार दीमक या फंगस की वजह से दशकों पुराने पेड़ों को नुकसान पहुंचता है। इन्हीं पेड़ों को बचाने का संकल्प अमर उजाला हिमालय बचाओ अभियान के तहत लिया गया। कवकों को नष्ट करने वाली दवा का पेड़ के तनों पर चूने के साथ लेपन किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत राजकीय पॉलीटेक्नीक परिसर श्रीनगर से की जाएगी। पॉलीटेक्नीक परिसर में उगे पेड़ों पर संस्थान के शिक्षकों व छात्र-छात्राओं के साथ स्टॉप टीयर्स संस्था के सदस्य चूने का लेपन करेंगे। इस मौके पर गढ़वाल विश्वविद्यालय के वानिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जीतेंद्र बुटोला छात्र-छात्राओं को इसका फायदा बताएंगे।