देहरादून जिले में भी डेंगू तेजी से फैलता जा रहा है। बुधवार को डेंगू की बीमारी से जिले में पहली मौत हुई है।
वहीं, अस्पतालों में डेंगू के 44 नए रोगी भर्ती किए। मसूरी के अलावा विकासनगर, चकराता, कालसी और शहरी क्षेत्र में डेंगू के रोगी मिल रहे हैं।
मसूरी के भट्ठा गांव निवासी रेखा रावत (35) को सोमवार को सीएमआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार तड़के उनकी मौत हो गई।
82 संदिग्ध रोगियों की जांच
उधर, दून अस्पताल में डेंगू के 82 संदिग्ध रोगियों की जांच की गई। इनमें 24 रोगी डेंगू पॉजीटिव पाए गए। श्रीमहंत इंदिरेश हॉस्पिटल में डेंगू के 19 रोगी भर्ती हुए हैं।
इनमें तीन सभावाला के उमरपाल, कालसी के रघुवीर शर्मा और ईशज घिल्डियाल नेहरू कॉलोनी के रहने वाले हैं।
बल्लूपुर चौक निवासी जोगेंदर सिंह को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती किया गया है। दून अस्पताल में डेंगू पॉजीटिव पाए गए रोगियों में चार देहरादून के हैं। इनके अलावा हरिद्वार, दिल्ली, सहारनपुर के रोगी हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. गुरपाल सिंह ने बताया कि जिन रोगियों का रैपिड कार्ड से टेस्ट हुआ है, उनकी एलाइजा टेस्टिंग कराई जाएगी। विकासनगर और कालसी में डाक्टरों की टीमें भेजी जा रही हैं।
ठीक होने के बाद भी नहीं छोड़ता डेंगू
ठीक होने के बाद भी डेंगू रोगी अलर्ट रहें। अस्पताल में बीमारी भले ही उनका पीछा छोड़ दे लेकिन डेंगू वायरस उनके शरीर के अंदर रहता है। जब भी फ्लू या मलेरिया होगा और प्रतिरोधक क्षमता घटेगी तो शरीर के अंदर छिपा वायरस हमलावर हो जाता है।
डेंगू की बीमारी से ठीक होने के बाद करीब तीन साल तक एहतियात बरतने की जरूरत होती है। सवाल उठता है कि ठीक होने के बाद डेंगू वायरस शरीर में कैसे रहता है? दरअसल, डेंगू वायरस चार प्रकार के होते हैं। ज्यादातर केस में सभी साथ रहते हैं।
तीन वायरस चुपचाप शरीर में पड़े रहते हैं
जब एडीज एजिप्टाई मच्छर किसी को काटता है तो चारों डेंगू वायरस शरीर में जाते हैं, लेकिन कोई एक वायरस अधिक पनप कर व्यक्ति को बीमार कर देता है। ब्लड की जांच में एक यही एंटीजन मिलता है। लेकिन तीन वायरस चुपचाप शरीर में पड़े रहते हैं।
जब कभी रोगी को फ्लू, मलेरिया या वायरल का संक्रमण होता है और प्रतिरोधक क्षमता घटती है तो यही शांत और सुस्त पड़े दूसरे डेंगू वायरस उभार कर देते हैं। रोगी की ब्लड रिपोर्ट में डेंगू पॉजीटिव आ जाता है।
प्लेटलेट्स काउंट कम रहता है
दून अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डा.मुकेश सुंदरियाल ने बताया कि बहुत से डेंगू रोगियों के ठीक होने के बाद भी प्लेटलेट्स काउंट कम रहता है। काउंट कम होना वायरस के शरीर के अंदर रहने का लक्षण है।
वेक्टर बोर्न डिजीजेज अभियान के तहत इस बाबत पहली शोध रिपोर्ट कानपुर से केंद्र सरकार को भेजी गई थी।
सीएमआई के सीनियर फिजिशियन डा.गोपाल शर्मा का कहना है कि और भी ताजा शोधों से यह तथ्य उजागर हुए हैं कि ठीक होने के बाद भी व्यक्ति के अंदर डेंगू के कुछ वायरस रह जाते हैं, जो अक्सर एक साथ हमला करते हैं।
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