प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों के हक की लड़ाई अब राज्य स्तरीय संगठन के माध्यम से लड़ी जाएगी। सभी संगठनों की बैठक में यह तय किया गया है कि राज्य स्तरीय एससी-एसटी-ओबीसी संगठन पुर्नगठित किया जाएगा।
उत्तराखंड सचिवालय एससी, एसटी बहुद्देेशीय मानव संसाधन विकास समिति की ओर से एक बैठक बुलाई गई। इसमें प्रदेश स्तरीय एससी, एसटी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। विभिन्न विषयों पर गंभीरतापूर्वक चर्चा की गई। तय किया गया कि आरक्षित विधानसभाओं के विधायकों का देहरादून में कार्यक्रम में सम्मान किया जाएगा। साथ ही एससी-एसटी से जुड़ी समस्याओं के संबंध में उन्हें ज्ञापन भी दिया जाएगा।
इस ज्ञापन के माध्यम से पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक कर, विधानसभा के पटल पर रखे जाने, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत राज्य में वरिष्ठता का निर्धारण राज्य सरकार की रोस्टर नीति के अनुरूप निर्धारित करने, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही।
विभिन्न विभागों में आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियों में आरक्षण की पुर्नसमीक्षा करते हुए निर्धारित आरक्षण लागू करने, एससी-एसटी वर्गों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं में ऋण उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से बैंक गारंटी, 2016 से 2022 तक एससी-एसटी वर्गों के वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति देने, एसपी-टीएसपी योजनाओं के तहत आवंटित बजट का शत-प्रतिशत व्यय उक्त वर्गों के लाभार्थियों को देने और असंगठित क्षेत्रों में राज्य के निवासियों के लिए लागू 70 प्रतिशत आरक्षण में एससी-एसटी को राज्य की ओर से निर्धारित 23 प्रतिशत आरक्षण देने आदि की मांग की जाएगी।
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बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि राज्य स्तरीय एससी, एसटी, ओबीसी संगठन पुर्नगठित किया जाएगा। बैठक में लोनिवि के सुनील सिंह, यूजेवीएनएल के रोहित कुमार, शिक्षा विभाग के मनमोहन भारती, विजय पाल सिंह, डॉ.ललित मोहन, कीरत पाल सिंह, विनोद कुमार, राजेंद्र कुमार, हरि सिंह आदि मौजूद रहे।