पत्र में धर्म संसद के मुख्य आयोजक का भीकिया गया जिक्र
पत्र में कहा गया है कि हिंसा की ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन के सक्रिय कार्रवाई न करने पर न्यायालय गंभीर आशंका जाहिर कर चुका है। पत्र में धर्म संसद के मुख्य आयोजक यती नरसिंहानंद का भी जिक्र किया गया। कहा गया कि चार आईपीएस अधिकारी (जिनमें दो सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक हैं) जनवरी में पत्र लिख चुके थे कि उत्तराखंड में धर्म संसद जैसे आयोजन होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही सांप्रदायिक महापंचायत पर रोक लगी
उत्तराखंड में नफरत और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश बेहद चिंताजनक है। जिस पर मशहूर लेखिका ने मामले को गंभीरता से लेने के अनुरोध किया। हाल ही में हरिद्वार में हुई हिंसा का भी पत्र में जिक्र है और कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही सांप्रदायिक महापंचायत पर रोक लगी।
ऐसे मामलों में जमानत न देने का अनुरोध
इन्होंने लिखा पत्र
लेखिका नयनतारा सहगल, पूर्व मुख्य सचिव एसके दास के साथ पूर्व सचिव विभा पुरी दास, कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति बीके जोशी, उप नियंत्रक एवं महालेखाकर (सेनि.) निरंजन पंत, डीआरडीओ के विज्ञानी (सेनि.) पीएस कक्कड़, सर्व सेवा संघ की बीजू नेगी, आरटीआई क्लब उत्तराखंड के अध्यक्ष बीपी मैठाणी, सिविल इंजीनियर सीवी लोकगड़ीवार, पर्यावरणविद फ्लोरेंस पांधी, लेखिका इंदिरा चंद, शिक्षाविद् ज्योत्सना बराड़, ममता गोविल और वीरेंद्र पैन्यूली, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, पूर्व शिक्षा निदेशक एनएन पांडेय, पत्रकार रंजोना बैनर्जी, पर्यावरणविद रवि चोपड़ा, रिटार्यड बैंकर रमेश चंद, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, आईजी पुलिस (सेनि.) एसआर दारापुरी, राजीव गांधी इंस्टीटयूट ऑफ कांटेम्पररी स्टडीज के निदेशक विजय महाजन, आईपीएस (सेनि.) विजय शंकर सिंह ने पत्र लिखा है।