जेल में छापा मारने के बाद इस बात का खुलासा हुआ था कि रंगदारी की रकम जेल के संविदा चालक ललित भट्ट के खाते में आती थी। खाते की जांच करने पर उसमें दस लाख रुपये का ट्रांजेक्शन भी पुलिस और एसटीएफ को मिला। बृहस्पतिवार की पूछताछ में ललित के एक और खाते का राज खुला है जिसकी जांच पुलिस कर रही है। माना जा रहा है कि इसी खाते की रकम को ललित अवैध धंधों में लगाता था।
कैदियों की पहली पसंद होती है बैरक नंबर सात
जिला जेल की बैरक नंबर सात यहां आने वाले कैदियों की पहली पसंद होती थी। इसके पीछे का कारण यहां मिलने वाला ऐशोआराम था। कलीम से पहले महिपाल इस बैरक का बॉस था। जेल के बाहर रहने वाले अपराधियों को भी इस बैरक की शानो-शौकत की जानकारी थी। कुछ समय पहले गिरफ्तार हुए 20 हजार के इनामी माओवादी भास्कर पांडे ने भी पुलिस गिरफ्त में आने के बाद इसी बैरक में रुकने की इच्छा जताई थी। भास्कर का उद्देश्य यहां मिलने वाली सुख सुविधाओं को भोगने के साथ ही यहां बंद कैदियों से नेटवर्क जोड़ना भी था।
जेल रंगदारी कांड में दो कैदियों सहित एक आरोपी जेल कर्मी को पूछताछ के लिए 48 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। पुलिस की तीन टीमें पूछताछ में लगाई गई हैं। कई बिंदुओं पर तीनों से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एसएसपी पंकज भट्ट