राज्य में होटल में ठहरने और रेस्टोरेंट में खाने-पीने की चीजों को सर्विस टैक्स से छूट स्थानीय होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के गले नहीं उतर रही।
उनका कहना है कि यह आपदा के मद्देनजर दी जाने वाली यह छूट राहत के छींटों जैसी है।
पांच साल होनी चाहिए छूट
आपदा से सर्वाधिक प्रभावित तीन जिलों रूद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी के लिए सर्विस टैक्स में छूट की मियाद कम-से-कम पांच साल होनी चाहिए थी और अन्य स्थानों के लिए कम-से-कम एक साल।
अकेले मसूरी, नैनीताल जैसे राज्य के मुख्य पर्यटन स्थलों का जिक्र करते हुए उनका कहना था कि इन्हीं दो जगहों का नुकसान 300 करोड़ रुपए से अधिक था।
20 करोड़ रुपए सालाना
सर्विस टैक्स के रूप में सरकार केवल 20 करोड़ रुपए सालाना वसूल रही थी। केवल इससे छूट दे देना बाकी नुकसान से कैसे उबारेगा। दूसरे, आफ सीजन की इस छूट से होटल इंडस्ट्री को कोई फायदा पहुंचने वाला नहीं।
सीजन जुलाई तक था, जो निकल चुका। इसके बाद स्नो फाल का बेहद कम समय का सीजन रह सकता है। मार्च तक पर्यटकों का टोटा रहेगा तो इस छूट के मायने क्या?
ऊंट के मुंह में जीरा
सर्विस टैक्स से यह छूट ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। ज्यादातर व्यवसाइयों के होटल तबाह हो चुके हैं। इन्हें खड़े करने के लिए उन्हें दूसरी सहायता के साथ टैक्स में छूट की लंबी मियाद तय की जानी चाहिए थी।
- संदीप साहनी, उत्तराखंड होटलियर्स एसोसिएशन।