पौड़ी जिले के लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के जंगल में घास लेने गई एक महिला को हाथी ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। जबकि उसकी साथी महिला को पटककर घायल कर दिया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही वन एवं पुलिस के अधिकारी ग्रामीणों संग घटनास्थल पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। घटना के बाद मौके पर पहुंचे लोगों को भी हाथी ने दूर तक दौड़ा दिया।
सनेह क्षेत्र के नाथूपुर निवासी सुनीता (33) पत्नी कैलाश अधिकारी गांव की महिलाओं पूनम पत्नी संदीप और सुंदरी देवी के साथ घास लेने लालपानी के जंगल गई थी। वापसी में सबसे आगे चल रही पूनम के सामने यकायक हाथी आ गया।
इससे पूर्व कि वह संभलती हाथी ने सूंड में लपेटकर उसे नीचे पटका, लेकिन वह रास्ते से नीचे झाड़ियों में जा गिरी और बेहोश हो गई। हाथी इसके साथ ही तेजी से पूनम के पीछे आ रही सुनीता पर झपटा और उसे भी सूंड में लपेट कर नीचे पटक दिया।
इस बीच तीसरी महिला सुंदरी देवी को भागने का मौका मिल गया। वह जान बचाकर भागी तो हाथी ने भी उसके पीछे दौड़ लगा दी और उसे दूर तक खदेड़ दिया।
बचकर लौटी महिला ने सुनाई खौफनाक दास्तां
सुंदरी देवी के ओझल होते ही हाथी लौटा और पास ही झाड़ियों में छुप गया। इस बीच लोग बचाने आए तो हाथी ने उनको खदेड़ दिया और बेहोश पड़ी सुनीता को पैरों तले कुचल कर मौत के घाट उतार दिया जबकि झाड़ियों के बीच पड़ी होने के कारण हाथी की नजर पूनम पर नहीं पड़ी।
हाथी के चंगुल से बचकर आई सुंदरी देवी ने गांव वालों को हाथी के हमले की बात बताई। बताया कि साढ़े ग्यारह बजे के करीब तीनों घास लेकर जंगल के रास्ते से नीचे उतर रही थीं। तभी संकरे मार्ग पर उनके ठीक सामने बड़े दांतों वाला हाथी खड़ा हो गया।
इससे पहले कि वे भाग पाते, हाथी ने उनपर हमला कर दिया। सुनीता की मौत से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोग जंगल में जाने से कतराने लगे हैं। लोगों का कहना है कि लालपानी क्षेत्र में हाथी के हमले की यह पहली घटना है।
बचाने गए लोगों को खदेड़कर पेट पर रखा पैर
सुंदरी देवी द्वारा गांव वालों को घटना की सूचना दिए जाने के बाद गांव के कमल सिंह रावत आपने दो साथियों के साथ जंगल में उन्हें तलाशने निकल पड़े। कमल सिंह ने बताया कि वे जब सुनीता के पास पहुंचे तब वह मार्ग पर गिरी हुई थी, और उसकी सांसें चल रही थी।
उन्होंने जैसे ही उसे रास्ते से खींचने का प्रयास किया। झाड़ी में छुपा बैठा हाथी उनकी ओर दौड़ा। आनन फानन में उन्होंने पीछे की ओर दौड़ लगा दी। हाथी ने भी उनके पीछे दौड़ लगाई। काफी देर तक पीछे दौड़ने के बाद हाथी रुककर उनकी ओर देखने लगा। इसके बाद हाथी लौटा और सुनीता के पेट पर पैर रखकर उसे कुचल डाला। नतीजतन उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग की बंदूक हुई फेल
गुस्साए हाथी के झाड़ियों में छुपे होने की खबर से लोग जंगल में नहीं जा पा रहे थे। तब वन विभाग के एसडीओ जेएस रावत और रेंज अधिकारी मौके पर पहुंचे। बंदूक मंगाई गई। उन्होंने कर्मचारियों को हवाई फायर करने के निर्देश दिए, लेकिन बंदूक नहीं चली।
बाद में पता चला कि बंदूक में कारतूस फंस गया। वन कर्मियों ने किसी प्रकार पटाखे फोड़कर हाथी को भगाया। इसके बाद पूनम को झाड़ियों से निकालकर आकस्मिक एंबुलेंस सेवा से अस्पताल पहुंचाया गया।
मृतक के परिजनों को मिले आर्थिक सहायता
जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला और उपजिलाधिकारी जीआर बिनवाले हाथी के हमले में घायल और मृतक महिला के घर पर गए। उन्होंने हाथी के हमले में मारी गई सुनीता अधिकारी के परिजानों को ढांढस बंधाया। सुमन कोटनाला ने वन विभाग और प्रशासन से पीड़ित परिवारों की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
वर्ष 2015 में हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं
12 जनवरी को कोटद्वार रेंज में सुखरौ बीट में लकड़ी बीनने गई शिवपुर निवासी गंगोत्री देवी पर हाथी ने हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया।
20 जनवरी लैंसडौन वन प्रभाग के कोटडी रेंज में वन दरोगा भारत सिंह चौधरी गश्त कर रहे थे तभी मोड़ पर खड़े हाथी ने उनपर हमला कर दिया और उन्हें पटककर मार डाला।