हिमालयी क्षेत्र में बह रहे झरनों से सिर्फ पानी नहीं मिलेगा, बल्कि घर भी रोशन होंगे। जी, भारत, नार्वे और आइसलैंड के संयुक्त शोध ने इसे साकार कर दिखाया है।
जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बिखरे तीन सौ से अधिक गर्म झरने सिर्फ गरम पानी ही नहीं देते इनमें ऊर्जा का भंडार भी भरा पड़ा है। इस ऊर्जा से सर्द इलाकों में घरों के भीतर ‘हीटिंग सिस्टम’ के साथ बिजली भी बनेगी।
इस प्रयोग को पूरी तरह अमल में लाने के बाद ठंडे इलाके में लोगों के घर बिना पावर-कट जगमग रह सकेंगे। वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान तथा नार्वे और आइसलैंड के संयुक्त शोध ने इसे साकार कर दिखाया है।
गर्म झरनों की ‘जियो थर्मल एनर्जी’ से लद्दाख में हीटिंग सिस्टम और आइसलैंड में बिजली बनाने का प्रयोग सफल रहा है। हिमालय क्षेत्र के भूगर्भ में जहां इंडियन और तिब्बती प्लेटें मिलती हैं, उसके पास 300 से अधिक गर्म झरने (हॉट स्प्रिंग) पैदा हो गए हैं। धरती की ऊर्जा के कारण इनसे गर्म पानी लगातार निकलता है।