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प्रणब दा की क्लास का असर, सात दिन का होगा गैरसैंण सत्र

Wed, 20 May 2015 02:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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विधानसभा सत्र कम से कम सौ दिन चलाने की राष्ट्रपति की नसीहत पर अमल गैरसैंण से होगा। यह राष्ट्रपति के भाषण का ही असर है कि गैरसैंण में अब सत्र एक-दो दिन का नहीं बल्कि पूरे सात दिन का होगा और वह भी छुट्टियां हटाकर।
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प्रदेश में अभी तक सिर्फ बजट सत्र ही इतना लंबा खिंचता रहा है। साथ ही यह बहस भी उठ खड़ी हुई है कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी या स्थायी। अब प्रदेश सरकार को टेंशन यह है कि गैरसैंण पर गुप्त एजेंडे की बजाय उसे खुलकर काम करना पड़ सकता है।

सोमवार को विधानसभा में भाषण के दौरान राष्ट्रपति ने संसदीय ज्ञान का मर्म सामने रखते हुए कहा था कि सदन कम से कम 100 दिन चले। इससे पहले केरल, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और मेघालय में भी राष्ट्रपति ने इसी बात पर जोर दिया था। लेकिन, उत्तराखंड में गैरसैंण का जिक्र कर राष्ट्रपति ने मामले को नया मोड़ दे दिया।
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ग्रीष्मकाली राजधानी का जिक्र कर बढ़ाई मुश्किल

राष्ट्रपति के संबोधन से पहले ही यह तय हो चुका था कि गैरसैंण में सितंबर में विधानसभा सत्र होगा। राष्ट्रपति के दौरे के बाद इसमें यह भी जुड़ गया कि सत्र कम से कम सात दिन का होगा। इससे अलग राष्ट्रपति ने गैरसैंण के साथ ग्रीष्मकालीन राजधानी का जिक्र कर प्रदेश सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।

प्रदेश में फिलहाल स्थायी राजधानी का मुद्दा सबसे अहम है। लिहाजा एक साथ परस्पर विरोधी फैसले भी हो रहे हैं। गैरसैंण में राजधानी जैसी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं पर देहरादून में भी विधानभवन तैयार करने का फैसला है। राष्ट्रपति कह गए हैं तो अब प्रदेश सरकार को अपना रुख साफ भी करना पड़ सकता है।

राष्ट्रपत‌ि ने कहा
मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि राज्य सरकार चमोली जिले में स्थित गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाना चाहती है तथा नए विधान भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है।
-राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, सोमवार को सदन में दिए गए भाषण में

संबोधन में गैरसैंण का जिक्र बड़ी बात

राष्ट्रपति ने जो कहा वह हमारे सर माथे। पर तथ्य यह भी है कि प्रदेश सरकार गैरसैंण में राजधानी के समान सुविधाएं विकसित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इतना तय है कि गैरसैंण पर कोई भी फैसला सभी की सलाह से ही किया जाएगा।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री

राष्ट्रपति ने गैरसैंण का नाम लिया यह बड़ी बात है। यह भी तय होना बाकी है कि गैरसैंण स्थायी राजधानी बनेगी या ग्रीष्मकालीन राजधानी। पर सुविधाओं का विकास गैरसैंण में हो रहा है। करीब 300 करोड़ रुपये गैरसैंण में खर्च हो रहे हैं। बड़ी बात यह भी है कि जिम्मेदारी और आधिकारिक रूप से सदन में गैरसैंण का जिक्र किया गया। प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मौका है। अब यह राज्य के अधिकार क्षेत्र में है कि वह राजधानी घोषित करे। राज्य गठन के समय केंद्र सरकार को यह अधिकार था। पर उस समय देहरादून को अस्थायी राजधानी घोषित कर ही किनारा कर लिया गया।
-गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष
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अभी तय नहीं ग्रीष्मकालीन या स्थायी

देश के प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति ने सदन में गैरसैंण का जिक्र किया, यह हमारे लिए बड़ी बात है। मेरी व्यक्तिगत राय यही है कि  गैरसैंण को स्थायी राजधानी ही बनाना चाहिए। हम तैयारी इसी की तो कर रहे हैं। पर अभी तय नहीं है कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी है या स्थायी राजधानी।
-किशोर उपाध्याय, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

दिन भर फोन आते रहे कि राष्ट्रपति ने गैरसैंण का जिक्र किया। स्थायी या ग्रीष्मकालीन तो राज्य सरकार को तय करना है। मेरा मानना है कि देहरादून को राजधानी बताया जाता रहा है। कोई उसे अस्थायी राजधानी नहीं कहता। इसी से शायद यह भाव गया कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाई जा रही है। महत्वपूर्ण यह है कि गैरसैंण राजधानी बनाई जा रही है।
-एके मैखुरी, उपाध्यक्ष विधानसभा और अध्यक्ष गैरसैंण विकास परिषद
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