वन अग्नि की घटनाओं के मद्देनजर कालसी वन विभाग की सुरक्षा की टीम के छह सदस्यों को नरेंद्र नगर में अस्थायी रूप से तैनात किया गया था। एक माह का समय गुजर जाने के बाद भी वनकर्मियों की वापसी पर विभाग के माध्यम से कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। इसकी वजह से कालसी क्षेत्र में अवैध रूप से कराए जाने वाले लकड़ी के कटान व तस्करी के साथ आग सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं ठप होकर रह गई हैं।
ऋषिकेश व आसपास के क्षेत्रों में जंगलों में लगने वाली आग को देखते हुए अप्रैल 2022 के पहले सप्ताह में कालसी रेंज के अधिकारी के नेतृत्व में वन विभाग के सुरक्षा दस्ते में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों की छह सदस्यीय टीम को नरेंद्रनगर वन प्रभाग में अस्थायी रूप से ड्यूटी पर लगाया गया था। एक माह गुजरने के बावजूद उनकी वापसी नहीं हुई है। इसकी वजह से कालसी वन क्षेत्र में होने वाले अवैध कटान व तस्करी, अवैध खनन की रोकथाम के लिए की जाने वाली कार्रवाई व जंगल की आग जैसे खतरों से बचाव की व्यवस्थाएं चौपट पड़ी हुई हैं।
विस्तृत क्षेत्र में फैला है कालसी वन प्रभाग का जंगल
कालसी वन प्रभाग का जंगल बेहद विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल 86342.81 हेक्टेयर है, जिसमें आरक्षित वन 23318.50 हेक्टेयर, अवर्गीकृत व निहित वन 2.80 हेक्टेयर और सिविल वन क्षेत्र 63022.51 हेक्टेयर है। वन प्रभाग की कालसी प्रथम, कालसी द्वितीय, चुरानी, क्वानू, बरौंधा, चकराता, तिमली, चौहड़पुर, लांघा समेत कुल 9 रेंज में बंटे वन क्षेत्र की तिमली, चौहड़पुर व लांघा रिजर्व फॉरेस्ट के अंतर्गत आती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आग के सीजन के समय में कालसी वन प्रभाग के जंगलों में भी वनाग्नि का खतरा लगातार बना रहता है। इसके अलावा वन क्षेत्र में तैनात रहने वाले सुरक्षा दस्ते पर अवैध खनन व लकड़ी चोरी जैसी घटनाओं की रोकथाम के अलावा आग संबंधी सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने की जिम्मेदारी रहती है। क्षेत्र के निवासी प्रताप सिंह, हरि सिंह गुमान सिंह का कहना है कि क्षेत्र में लगातार आ रही अवैध खनन व आग लगने की घटनाओं की सूचनाओं पर कार्रवाई के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त संख्या में कर्मचारी मौजूद रहने चाहिए।
सुरक्षा दल को नरेंद्रनगर वन प्रभाग भेजने या उनकी वापसी की कार्रवाई उच्च स्तर का निर्णय है। इसमें वन प्रभाग की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई को अमल में नहीं लाया जा सकता है।
- बीबी मार्तोलिया, डीएफओ, कालसी वन प्रभाग
नरेंद्रनगर वन प्रभाग में वनाग्नि का प्रकोप बढ़ने के कारण प्रशासनिक स्तर पर यह कदम उठाया गया था। आने वाले समय में उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी।
- सुशांत पटनायक, मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल