नेशनल परमिट के नियमों का धता बताते हुए आईएसबीटी से महज एक किलोमीटर की दूरी पर डग्गामारों का बस अड्डा चल रहा है। दिल्ली, जयपुर से लेकर बिहार तक की बसें यहां आसानी से उपलब्ध हैं। बावजूद इसके कि शासन ने डग्गामारी पकड़े जाने पर संबंधित आरटीओ, एआरटीओ के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया जा चुका है।
दरअसल, पिछले साल 21 सितंबर को तत्कालीन परिवहन सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा के निर्देशों पर अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया था कि नेशनल परमिट पर लोक सवारियां ले जाने वाली निजी बसों और डग्गामार बसों का संचालन रोकने को परिवहन विभाग और रोडवेज के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित हो। इस टीम में आरटीओ, एआरटीओ और रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक या महाप्रबंधक शामिल होंगे। यह भी तय किया गया था कि नियमों से इतर संचालन होने पर आरटीओ-एआरटीओ और रोडवेज के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। अगर डग्गामारी हुई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। आदेश का असर यह हुआ कि रातों रात बसों का संचालन बंद हो गया। अवैध संचालन बंद होने से रोडवेज की कमाई भी बढ़ती चली गई।
कुछ महीनों तक सख्ती का असर रहा, लेकिन फिर पुराना ढर्रा शुरू हो गया है। देहरादून में आईएसबीटी से करीब एक किलोमीटर दूरी पर राधा स्वामी सत्संग भवन के ठीक सामने के प्लॉट से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। बाकायदा डग्गामारों ने यहां अस्थायी बस अड्डा बना लिया है। दिन ढलने के साथ ही यहां से बसों का संचालन शुरू हो जाता है। प्लॉट में सवारियों की भीड़ देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां से न केवल दिल्ली बल्कि जयपुर से लेकर कानपुर और बिहार तक की बसें आसानी से उपलब्ध हैं।
डग्गामारी को लेकर पूर्व में भी काफी सख्ती की जाती रही है। अगर इस तरह का संचालन हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -एसके सिंह, संयुक्त परिवहन आयुक्त
ऑटो से दी जा रही शटल सर्विस
अवैध बसों के संचालन का पूरा सिस्टम काफी मजबूत हो गया है। लोगों को अब इन बसों तक पहुंचने के लिए ऑटो से शटल सेवा भी दी जा रही है। आप संपर्क करेंगे तो एक ऑटो आपको घर लेने आएगा और सीधे इस अस्थायी बस अड्डे तक पहुंचा देगा।
ऑनलाइन होती है बुकिंग
इन बसों के लिए ऑनलाइन बुकिंग होती है। बसों का संचालन करने वाले लोग चुपके से इस पूरे काम को चला रहे हैं। बुकिंग करने वालों को सीधे आईएसबीटी के आसपास की लोकेशन दी जाती है। वह समय से पहुंच जाते हैं और यहां से सफर करते हैं।
खतरनाक हो सकता है इन बसों से सफर
अवैध बसों से सफर करना यात्रियों के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर ऐसी बस कहीं हादसे का शिकार हो जाती है तो यात्रियों और उनके परिजनों को बीमा क्लेम या फिर मुआवजा आदि की प्रक्रिया का लाभ नहीं मिलता है।
रोडवेज के किराये में स्लीपर का सुविधा
लोगों के इन बसों में सफर के पीछे इनकी सुविधा भी है। रोडवेज बसों में स्लीपर और एसी के मुकाबले इन बसों में सभी सुविधाएं मिलती हैं। यात्री सोते हुए सफर कर सकते हैं। उन्हें कंबल तक की सुविधा दी जाती है।
पूर्व में कई बार चला अभियान
इन बसों को रोकने के लिए पहले कई बार अभियान चल चुका है। कई बार अवैध बस संचालक अपने ठिकाने बदल चुके हैं। एक बार सहस्त्रधारा क्षेत्र में बसें पकड़ी गई थी। आईएसबीटी के आसपास भी कई बार बसें सीज हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद अभी भी संचालन जारी है।