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इस नामचीन संस्थान में हो रहा कर्मचारियों का शोषण

Wed, 23 Apr 2014 12:40 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री एंड रिसर्च एजुकेशन (आईसीएफआरई) से जुड़े संस्थानों में वेतन पर भी दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है।
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100 कर्मचारियों को चौथे वेतनमान के आधार पर वेतन
आईएफएस अधिकारी और वैज्ञानिक जहां छठे वेतनमान के आधार पर तनख्वाह हासिल कर रहे हैं, वहीं टेक्निकल और सपोर्टिंग स्टाफ के 1100 कर्मचारियों को आज भी चौथे वेतनमान के आधार पर वेतन दिया जा रहा है।

यह स्थिति तब है, जबकि केंद्रीय मंत्रालयों के अधीन आने वाले दूसरे सभी स्वायत्त संस्थानों में सभी कर्मचारी छठे वेतन आयोग का लाभ ले रहे हैं।

कर्मचारियों ने अपनी शिकायत सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में की, जहां वे मुकदमा जीते भी।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित दो अन्य मंत्रालयों ने 17 मार्च 2009 को वेतन विसंगति दूर करने के लिए तीन अंडर सेक्रेटरी मालती रावत, डीपी सिंह और एमएल वाधवानी की एक समिति बनाई।
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वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था
समिति की सिफारिशों के आधार पर 21 नवंबर 2011 को तत्कालीन वन एवं पर्यावरण सचिव डॉ. टी चटर्जी ने भी साफ किया कि आईसीएफआरई, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था है।

ऐसे में यहां वित्त मंत्रालय की अनुमति के आधार पर सभी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिया जाना चाहिए। लेकिन तीन साल बाद भी कर्मचारी चौथे वेतन आयोग के तहत मामूली पगार पर काम करने को मजबूर हैं।
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अन्य संस्थानों में मिलता है लाभ
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन आईसीएफआरई की तरह सीएसआईआर और आईसीएआर भी स्वायत्त संस्थान हैं। यहां हर बार लागू हुए वेतन आयोग का सभी कर्मचारियों को लाभ मिला।
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