चमोली जिले की मलारी घाटी स्थित द्रोणगिरि गांव के लोग भगवान हनुमान से बेहद खफा है। यहां के लोग गांव में उनका मंदिर तक बनाते। दरअसल संजीवनी बूटी के लिए पूरा पहाड़ उखाड़ ले जाने के कारण गांव के लोग भगवान हनुमान से आज भी खफा बताए जाते हैं।
हिमालयी क्षेत्र में ऐसी कई पौराणिक कथाएं और किवदंतियां हैं, जिन्हें अब राज्य सरकार संकलित करवा रही है। यमुना घाटी, टौंस घाटी, गंगा बेसिन और इससे जुड़ी सहयोगी नदियों की घाटियों का हर क्षेत्र अपने में एक पौराणिकता संजोये हुए है।
इन किवदंतियों को संकलित कर हिमालयी संस्कृति को सुरक्षित करने के साथ इसे विश्व पटल पर लाया जाएगा। इन क्षेत्रों को इको टूरिज्म से भी जोड़ा जाएगा। पहली बार प्रदेश सरकार ने अपने बजट में कि वदंतियों के संकलन का प्रावधान किया है।
उत्तराखंड के हर क्षेत्र की प्रत्येक कथा दिलचस्प है:
उत्तराखंड के हर क्षेत्र की प्रत्येक कथा दिलचस्प है। सैकड़ों साल की ये किवदंतियां आज क्षेत्रीय बुजुर्गों के दिलों में महफूज हैं। इन्हें माना भी जा रहा है, जैसे उत्तरकाशी जिले की टौंस घाटी के फतेह पर्वत क्षेत्र के लोग दुर्योधन का मंदिर बनाकर उसकी पूजा करते हैं। यहां का राजा मानवता प्रेमी तो था लेकिन कौरवों की तरफ रहा।