शासन- प्रशासन आपदा प्रभावित गांवों में राहत कार्य पूरा होने के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत उससे उलट है।
पेयजल योजना क्षतिग्रस्त
गोपेश्वर के कंडारा गांव में आपदा के छह माह बाद भी ग्रामीण जलापूर्ति के लिए भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के दौरान सुनाली-मंगरोली पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो गई थी।
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आपदा के छह माह गुजरने के बाद भी जलापूर्ति सुचारु करने के लिए केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। जुलाई में सुनाली गांव में बादल फटने से पेयजल योजना के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण आस-पास के गदेरों से पानी ला रहे थे।
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अब बारिश बंद होने के बाद गदेरों में भी पानी सूखने से और दिक्कत हो रही है। पेयजल आपूर्ति सुचारु न होने से बेसिक स्कूल और जीआईसी में मीड-डे मील योजना भी प्रभावित होने लगी है।
20 दिन बाद भी सुधार कार्य नहीं
ग्रामीण बेसिक स्कूल की प्रधानाध्यापक कांता देवी और राकेश पंत का कहना है कि जलापूर्ति सुचारु करने के लिए सूचना देने के बाद विभागीय अधिकारियों ने 18 नवंबर को पेयजल लाइन का निरीक्षण कर पेयजल आपूर्ति सुचारु करने का आश्वासन दिया था। तब से 20 दिन बाद भी विभाग सुधार कार्य नहीं कर पाया है।
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पेयजल योजना के सुधार के लिए जल संस्थान की कर्णप्रयाग शाखा को निर्देशित किया गया है। वर्तमान तक पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है तो इसे दिखवाया जाएगा तथा शीघ्र गांव में पेयजल आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी।
- नरेंद्र पयाल, ईई, जल संस्थान, चमोली