मीडिया सेंटर में सचिवालय संघ की पत्रिका निशंता के विमोचन के अवसर पर सीएम हरीश रावत की पीड़ा फिर उभर आई। सवालिया लहजे में अधिकारियों से पूछा कि क्या यह राज्य केवल मुख्यमंत्री पैदा करने के लिए बना है।
कहा, ऐसी क्या वजह है कि छोटा राज्य होने के बावजूद फाइलों पर निर्णय लेने में लंबा वक्त लग जाता है... ऐसे में आपको नींद कैसे आ जाती है, कम से कम मुझे तो नहीं आती।
सचिवालय संघ के नेताओं की लंबी फेहरिस्त के बाद सीएम ने कहा कि मुझे दो बिन्दुओं पर जवाब चाहिए। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में निवेश में उत्तराखंड का 23वां स्थान है। और एक एनजीओ के अध्ययन में प्रति व्यक्ति उत्पादकता में राज्य का नंबर 17वां है, जबकि यूपी 13वें स्थान पर रहकर हमसे बेहतर कर ले गया।
कहा, तीन साल बाद होगा कार्य का मूल्यांकन
सीएम ने कहा कि हो सकता है यह सब जानकर भी आपको नींद आती हो, लेकिन मुझे नहीं आती। यदि आप समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से काम कर मेरी रेटिंग सुधार दें तो फिर खाता ना बही, सचिवालय संघ जो कहे वही सही।
सीएम बोले कि उत्तराखंड छोटा राज्य है, त्वरित और पारदर्शी निर्णय होने चाहिएं, लेकिन मैं देखता हूं कि जिलों में भी इस बात को लेकर भय बना रहता है कि यदि एक बार फाइल सचिवालय गई तो फिर पता नहीं कब लौटे। ऐसा क्यों है कि प्रदेश की 30 प्रतिशत आबादी की आय आज भी 30 हजार रुपये से ज्यादा नहीं है, क्यों हजारों लोग आज भी बेघर हैं।
मैं आपकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार ही नहीं करूंगा, पूरा भी कर दूंगा, लेकिन कार्यशैली बदलने का कोई इंडीकेटर तो दीजिए। मैं तीन महीने बाद कार्य का मूल्यांकन भी कराऊंगा।
सातवें वेतन आयोग पर पहले ही चेताया
केंद्र सरकार ने कह दिया है कि साथ दौड़ना पड़ेगा वरना कुछ नहीं मिलेगा। आप प्रोडक्टिविटी बढ़ाइए फिर मेरा हुनर भी देखिए। इस दौरान संघ के अध्यक्ष नरेंद्र प्रसार रतूड़ी, महामंत्री प्रदीप पपनै समेत तमाम पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
सीएम हरीश रावत ने कहा कि आप बहुत खुश होंगे कि सातवां वेतन आयोग आ रहा है, लेकिन आज की स्थिति में यदि आयोग की सिफारिश लागू हुई तो छह महीने बाद किसी को वेतन नहीं मिल पाएगा।
यदि 7वां वेतन आयोग चाहिए तो एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व बढ़ाना होगा। इसलिए सब एकजुट होकर लगो, वेतन भी बढ़ेगा और प्रदेश भी आगे बढ़ेगा।