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सफर-ए-हज: शैतान को कंकड़ियां मारीं, कुर्बानी हुई

Fri, 25 Sep 2015 02:17 AM IST
मक्का से तारिक खान
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मुजलफा में सारी रात खुले आसमान के नीचे इबादत में गुजारने के बाद हम लोग मीना के जमरात पहुंच गए हैं। सऊदी समय के मुताबिक सुबह के 11.30 बजे हैं। हम लोग शैतान को कंकड़ियां मार चुके हैं। भीड़ इतनी है कि रेंग-रेंगकर चलना पड़ रहा है।
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लाखों लोग एक साथ शैतान को जब कंकड़ियां मारते हैं तो लगता है कि जैसे मधुमक्खियों का झुंड जाकर शैतान रूपी दीवार से जा टकराता हो। भीड़ इतनी है कि तिल रखने को जगह नहीं है। शैतान को कंकड़ियां मारने की रस्म पूरा करने के लिए लोग एक तरफ से जा रहे हैं और दूसरे रास्ते से लौटते हैं।

हम लोग जमरात से शैतान को कंकड़ियां मार कर अजीजिया में अपनी कयामगाह में पहुंच चुके हैं। हमें यहां पहुंचने में लगभग सवा घंटा लगा है। अभी-अभी खबर मिली है कि जमरात में शैतान को कंकड़ी मारते वक्त भगदड़ मच गई और हादसा हो गया है। लोगों के चेहरों पर तनाव उभर आया है।
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अभी यहां पहुंचे एक साथी ने बताया कि अचानक बहुत भीड़ जमरात पहुंची थी जिसमें भगदड़ मचने से हादसा हो गया है। हज कमेटी ने लोगों को फिलहाल मीना जाने से रोक दिया है। जमरात में बचाव कार्य चल रहा है। हम लोग एक-दूसरे को फोन करके खैरियत ले रहे हैं।
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अराफात के लिए निकले तो दी गई पर्ची

जिस वक्त हम लोग शैतान को कंकड़ी मार रहे थे तो देखा, तीन हेलीकॉप्टर लगातार मीना से अराफात, मुजलफा और जमरात के ऊपर गश्त कर रहे हैं। जहां कंकड़ियां मारी जाती हैं वहां भी काफी सुरक्षा बल रहा है। सऊदी अरब में आज बकरीद है। जब हम लोग मीना से अराफात के लिए निकले थे तभी हम लोगों को परची दे दी गई थी।

परची में बताया गया था कि हम लोगों के नाम पर जानवर की कुर्बानी किस वक्त दी जाएगी। उस वक्त पर आज हम सारे लोगों ने अपने सिर के बाल उतरवा दिए हैं। माहौल थोड़ा शांत हो रहा है हम लोगों ने गुस्ल कर लिया है। खाना-ए-काबा जाने की तैयारी में हैं। खाना-ए-काबा में तवाफ करने के बाद मीना के अपने खेमे में जाना है।

विशेष सहयोग- हाजी राव शेर मोहम्मद, चेयरमैन हज समिति उत्तराखंड
प्रस्तुति- रजा शास्त्री-9675898214

पाठकों की प्रतिक्रिया
सफर-ए-हज पढ़ कर बहुत अच्छा लगा। मैं एक बार हज कर चुका हूं, लेकिन कॉलम पढ़ते वक्त लगा कि दोबारा हज में हूं।
-हाफिज रियाज अहमद, लाखरदेवा शेख, झबरेड़ा

सफर-ए-हज पढ़कर लगा कि मैं हज में हूं। जेहन में हज की पूरी तस्वीर उभर आई। दिल में ख्वाहिश पैदा हुई कि मैं हज करने जाऊं।
-शेर अली, समीक्षा अधिकारी, देहरादून
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