रविवार को गढ़ी कैंट क्षेत्र के सेप्टिक टैंक के ऊपर कांटेदार तारों में फंसकर मरी मादा गुलदार की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट ने वनाधिकारियों को चौंका दिया। मादा गुलदार के पेट से पान मसाला के पाउच निकले हैं। इसके साथ ही कचरा और कीड़े पाए गए हैं।
इस पर गुलदार के डीएनए सैंपल, कीड़ों और बिसरा को जांच के लिए वन्य जीव संस्थान भेज दिया गया है। सवाल यह है कि पान मसाला के पाउच मादा गुलदार के पेट में पहुंचे कैसे? कुछ अधिकारी इसे वन्य जीवों के व्यवहार में आ रहे बदलाव का संकेत भी मान रहे हैं।
चार साल की मादा गुलदार की मौत पेट में कांटेदार तार घुसने से ही हुई है। पोस्टमार्टम में गुलदार की मौत की वजह अत्याधिक रक्तस्राव पाई गई है। वन विभाग के कुछ अधिकारियों को शक था कि कहीं गुलदार की मौत किसी के जहर देने से तो नहीं हुई? पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हो गई है कि उसे जहर नहीं दिया गया था, लेकिन गुलदार के पेट से पान मसाला, कचरा और कीड़े निकलने से मामला उलझ गया।
हैरत में वन अधिकारी, पेट में कैसे पहुंचा पाउच
वन्य जीवों के व्यवहार में बदलाव का अध्ययन कर रहे वनाधिकारियों का अंदेशा है कि कहीं गुलदार ने भूख की वजह से कचरा तो नहीं खाया? वहीं कुछ वनाधिकारियों का कयास है कि उसने कुत्ता, सूअर, गाय-भैंस खाई होगी जिससे उसके पेट में पान मसाला पहुंच गया।
कुछ अधिकारियों का तर्क है कि गुलदार ने पूरा कुत्ता या सूअर तो नहीं निगला होगा, मांस नोंच कर खाया होगा, ऐसे में मसाला के पाउच और कचरा अंदर कैसे पहुंचा? इस सवाल का हल ढूंढने के लिए वन्य जीव संस्थान गुलदार के पेट से निकले कीड़ों, डीएनए फिंगर प्रिंट और बिसरा पर शोध करेगा।
इनका है कहना
यह हैरत वाली बात है, हो सकता है गुलदार ने उस जानवर को खाया जिसने पान मसाला खाया हो।
-धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव)