राजधानी दून के अलावा पूरे जिले में भूसे की कमी को देखते हुए प्रशासन की ओर से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। डीएम डॉ. राजेश कुमार ने सभी एसडीएम को आदेश जारी कर भूसे की अनावश्यक भंडारण के साथ कालाबाजारी रोकने के निर्देश देते हुए जिले से बाहर भूसा भेजने पर रोक लगा दी।
डीएम ने आदेश में कहा कि जिले में जितनी भी गत्ता फैक्टरियां हैं, उनमें भूसे की आपूर्ति न होने पाए। डीएम ने अफसरों को निर्देशित किया कि सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्रों में भूसे की कमी किसी भी सूरत में न होने पाए। साथ ही यदि ईंट-भट्ठा फैक्टरियों में भूसे का इस्तेमाल होते पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, समेत कई जिलों में भूसे की भारी कमी हो गई है। हरियाणा समेत कई राज्यों से भूसे की आपूर्ति कम होने से तमाम जिलों में भूसे का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में सचिव पशुपालन एवं सहकारिता की ओर से सभी डीएम को आदेश जारी किया गया कि वे अपने जिलों में भूसे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराएं, ताकि पशुओं के सामने चारे का संकट न हो।
डीएम का कहना है कि यदि कोई भी व्यक्ति भूसे की कालाबाजारी करता या दूसरे जिले में भेजता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा समेत दूसरे राज्यों के भूसे की आपूर्ति कम होने से कीमतों काफी वृद्धि हो गई है, जिससे पशुुपालकों को पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भारी साबित हो रहा है। यह स्थिति तब है जब यूपी, एमपी, हरियाणा, पंजाब जैसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में गेहूं की फसल के बाद बड़े पैमाने पर भूसे का उत्पादन हुआ है, लेकिन कालाबाजारी व भूसे का गत्ता फैक्टरियों, ईंट-भट्ठों समेत कई औद्योगिक इकाइयों में बहुत अधिक इस्तेमाल होने से पशुपालकों के सामने भूसे का संकट खड़ा हो रहा है।