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देहरादून के लिए मंगलकारी रहा मंगलवार

Wed, 17 Sep 2014 10:22 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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मंगलवार का दिन अव्यवस्थाओं में उलझी उत्तराखंड की राजधानी के लिए मंगलकारी रहा। नगर निगम की तीन अहम योजनाओं की राह साफ हो गई।
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यह योजनाएं शहर की सुंदरता, स्वच्छता और सुविधा के लिहाज से अहम हैं। किसी भी योजना के पूरा होने में बजट रोड़ा नहीं बनेगा। उम्मीद है कि अब तक सफाई व्यवस्था में उलझे नगर निगम के खाते में जल्द ही कुछ उपलब्धियां होंगी।

सजा संवरा नजर आएगा घंटाघर
बदहाल हो चुके घंटाघर की तस्वीर जल्द ही बदली नजर आएगी। इसके सुंदरीकरण के लिए मंगलवार को मेयर विनोद चमोली ने 56 लाख 36 हजार रुपए जारी कर दिए हैं। कई साल पहले बनी घंटाघर के सुंदरीकरण की योजना बजट नहीं होने के कारण फाइलों में बंद थी।
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जबकि, हुडको ने 40 लाख रुपए के बजट को मंजूरी दी थी। काफी कोशिश के बावजूद बजट जारी नहीं हो पाया था। अब नगर निगम ने इस योजना के लिए बजट का इंतजाम कर लिया है।

मेयर ने बताया कि घंटाघर के चारों तरफ ग्रीन पार्क बनाया जाएगा। इसमें लाइटिंग इफैक्ट्स के साथ फव्वारे लगाएं जाएंगे। इसके लिए जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। घंटाघर पर घंटा लगाने का भी विचार है।

गोबर गैस प्लांट के लिए बजट और जमीन
गोबर गैस, स्लाटर और ग्रीन वेज प्लांट के लिए ब्राह्मणवाला में चार बीघा जमीन चिह्नित की गई है। योजना की पूरी लागत नौ करोड़ रुपये शासन देगा। प्लांट से पैदा होने वाली बिजली से नगर निगम को प्रतिमाह 25 लाख रुपए की आमदनी होगी।

मंगलवार को मेयर विनोद चमोली के हस्ताक्षर के बाद इसकी डीपीआर शासन को भेजी गई। प्लांट के लिए शहर की सभी डेरियों से गोबर लिया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि डेरियों से गंदगी नहीं फैलेगी। निगम के अनुसार इस प्रोजेक्ट में 15 से 20 लोगों को रोजगार मिलेगा।

फुटओवर ब्रिज पर विवाद सुलझा
नगर निगम और एमडीडीए के बीच फुटओवर ब्रिज पर जारी विवाद भी सुलझ गया है। एमडीडीए इन पुलों का निर्माण बीओटी (बिल्ट ऑपरेशन ट्रांसफर) मोड में निजी कंपनियों से कराएगा। ब्रिज पर विज्ञापन होर्डिंग से होने वाली कमाई कंपनी को मिलेगी।

इसका एक हिस्सा नगर निगम को टैक्स के रूप में मिलेगा। मंगलवार को एमडीडीए और नगर निगम के बीच इस संबंध में करार हुआ। समझौते के अनुसार इससे प्रति वर्ष निगम को चार लाख चालीस हजार रुपये मिलेंगे।
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हर तीन साल पर इसमें दस फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। मेयर ने बताया कि वैसे तो विज्ञापन पर केवल नगर निगम का अधिकार होता है, लेकिन इस बार बीच का रास्ता निकाला गया है। लेकिन अन्य प्रोजेक्टों में निगम ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं करेगा।
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