देहरादून के कालसी तहसील के सिमोग स्थित प्राचीन मंदिर के इतिहास में रविवार को एक नया अध्याय लिखा जाएगा, जब चार सदी के इतिहास में पहली बार मंदिर से शिलगुर, विजट और चूड़ू महाराज की पालकी एक दिन के प्रवास पर दलित गांव सराड़ी में प्रवेश करेगी। देव पालकी के प्रवास को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह है। देव पालकियां ग्राम प्रधान मकतूला देवी के घर में प्रवेश करेंगी।
एक दशक पहले मकतूला के ससुर माधोराम ने देवता से मन्नत मांगी थी, जो अब पूरी हो गई है। लिहाजा उनके निमंत्रण पर देव पालकी गांव में प्रवेश करने जा रही है। सिमोग में मंदिर का निर्माण 17 वीं सदी में हुआ था। मंदिर के प्रति जौनसार बावर के साथ ही हिमाचल के कई गांवों के लोगों की अटूट आस्था है।
प्राचीन शैली में निर्मित इस मंदिर की छटा दूर से ही देखते बनती है। लेकिन आज तक यहां स्थापित देवताओं की पालकियों ने दलित गांव में प्रवेश नहीं किया।
देवता ने जताई देव पालकी में गांव जाने की इच्छा
देवडोली
- फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
अब ग्राम प्रधान मकतूला देवी के ससुर माधोराम के आमंत्रण पर देव पालकी गांव आने को राजी हो गई है। शनिवार को दिन भर लोग देव प्रवास की तैयारियों में जुटे रहे। रविवार दोपहर दो बजे देव पालकी गांव में प्रवास करेगी। देवता के प्रवास के दौरान यहां भंडारे का भी आयोजन होगा।
ग्राम प्रधान मकतूला देवी का कहना है कि देव पालकियों के प्रवेश को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। गांव में 60 दलित परिवार रहते हैं। पुजारी परम दत्त शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में कोई भेदभाव नहीं है। देवता की इच्छानुसार ही देव पालकी को सराड़ी गांव ले जाया जा रहा है।
दलितों के मंदिर प्रवेश मामले पर हुआ था यहां बवाल
पूर्व सांसद तरुण तरुण विजय हमले में घायल हो गए थे।
- फोटो : फाइल फोटो
इससे पहले कालसी तहसील के ही दलित गांव चामड़ी में सामाजिक बदलाव की बयार बह चुकी है। 28 जून को यहां सामाजिक ताने बाने को दरकिनार कर शिलगुर देवता की पालकी ने गांव में प्रवेश किया था।
अब सराड़ी गांव में देव पालकी के प्रवेश से यह सकारात्मक मुहिम एक कदम और आगे बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों पोखरी गांव स्थित मंदिर में दलितों के प्रवेश पर काफी विवाद हुआ था। उग्र भीड़ ने पूर्व सांसद तरुण विजय और आराधना ग्रामीण विकास केंद्र समिति के संरक्षक दौलत कुंवर पर हमला कर दिया था।
इससे पूर्व गबेला और लक्सियार गांव में भी दलितों को मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद हुआ था। इस तरह की घटनाओं से जौनसार बावर की छवि धूमिल होने लगी थी, लेकिन अब यहां पर सामाजिक बदलाव की तस्वीर भी नजर आने लगी है।
Published By: Vivek Singh