हरियाली के लिए डीएफओ दून और सहारनपुर को जिम्मेदारी
पुरानी सड़क को पूरी तरह से वन क्षेत्र में बदलने के लिए एनएचएआई की ओर से डीएफओ देहरादून और सहारनपुर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज मौर्य ने बताया, इस काम के लिए 36 करोड़ 52 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।
मोबाइल टावर की भी जानकारी ली
सुप्रीम कोर्ट की ओवरसाइट कमेटी की ओर से क्षेत्र में लगने वाले मोबाइल टावर की भी जानकारी ली गई। इस पर एनएचएआई के अफसरों ने बताया कि पूरे क्षेत्र हर 500 मीटर की दूरी पर एक मोबाइल टावर लगाया जाएगा। इसके बाद यहां मोबाइल कनेक्टिविटी की कोई समस्या नहीं रहेगी।
ढाई से तीन घंटे में पूरा होगा सफर
परियोजना की लागत 11,970 करोड़ के लगभग है। इसे न्यूनतम 100 किमी प्रति घंटे की गति के हिसाब से डिजाइन किया गया है। वर्तमान में देहरादून से दिल्ली की दूरी 235 किमी है, जो कॉरिडोर के बनने के बाद घटकर 213 किमी रह जाएगी। दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून आर्थिक गलियारे के निर्माण से इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। दून-दिल्ली का सफर मात्र ढाई से तीन घंटे में पूरा हो सकेगा।