देहरादून के नियोजित विकास के नाम पर जोनल प्लान लागू करने पर सरकार की नींद 23 साल बाद तब खुली है, जब शहर की अधिकतर जमीनों पर आबादी बस चुकी है।
मास्टर प्लान लागू करने में बरती गई सुस्ती ने शहर की जमीनों को अनियोजित विकास की भेंट चढ़ा दिया। नदी-नालों, खेतों और खाली जमीनों पर बस्तियां बसती गईं, लेकिन सरकार की नींद नहीं खुली।
अब जिन क्षेत्रों में जोनल प्लान लागू करने की बात कही जा रही है, वहां कई कॉलोनियां बन चुकी हैं। ऐसे में भविष्य की तस्वीर तैयार करने वाला यह प्लान भी लागू होना नामुमकिन है।
मसूरी डायवर्जन में नहीं आबादी!
राजपुर रोड से आगे मसूरी डायवर्जन राजधानी में रियल इस्टेट कारोबार का ‘हॉट स्पॉट’ है। इस वक्त यहां बड़ी संख्या में निजी बिल्डरों की आवासीय योजनाएं चल रही हैं।
हैरत की बात यह है कि राजधानी का जो मास्टर प्लान लागू किया गया है, उसमें यह क्षेत्र गैर आबादी दर्शाया गया है। साफ है कि भविष्य में कभी मसूरी डायवर्जन के लिए कोई योजना बनेगी, तब तक यहां दर्जनों आवासीय योजनाओं में लोग बस चुके होंगे।
इन क्षेत्रों पर नहीं नजर
रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे सबसे अधिक अनियोजित विकास हुआ है। लोगों ने नदी की जमीनों पर कब्जे कर यहां बस्तियां बसा ली हैं। इन्हीं बस्तियों को मालिकाना हक की भी बात होने लगी है। इसके अलावा नत्थनपुर, बंजारावाला, ब्राह्मणवाला, रायपुर, सहस्त्रधारा रोड पर जो क्षेत्र जोनल प्लान के दायरे में रखे गए हैं, वहां भी अब कई कालोनियां बस चुकी हैं।
उठ रहे सवाल
- जोनल प्लान लागू हुआ तो संबंधित क्षेत्रों में रह रहे लोगों को हटाया कैसे जाएगा?
- जोनल प्लान के लिहाज से मार्केट, पार्क, स्कूल, सामुदायिक केंद्र कैसे बन पाएंगे?
- जिन क्षेत्रों में जोनल प्लान लागू होना है, वहां अभी चल रहे निर्माणों का क्या होगा?
यह हैं प्लान
मास्टर प्लान : किसी शहर के मास्टर प्लान में अलग-अलग क्षेत्र चिह्नित किए जाते हैं। प्लान में तय किया जाता है कि कौन सा क्षेत्र आवासीय होगा और कहां कामर्शियल गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
जोनल प्लान : मास्टर प्लान लागू होने के बाद जोनल प्लान तैयार किया जाता है। शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर हर क्षेत्र में कहां घर होंगे, कहां बाजार बनेगा, कहां पार्क बनाया जाएगा और कहां-कहां सड़कें होंगी यह तय किया जाता है।
माइक्रो प्लान : जोनल प्लान में कई माइक्रो प्लान होते हैं। इसके तहत अलग-अलग मोहल्लों में सीवर लाइन की व्यवस्था, नालियां, गलियां, पेयजल की पाइपलाइन आदि की व्यवस्था की जाती है।
अनियोजित आबादी ने शहर की शक्ल बिगाड़ दी है। सरकार अब सुनियोजित विकास की सोचे भी तो कर कुछ नहीं पाएगी। बिखरी हुई आबादी को हटाना असंभव है। माइक्रो प्लानिंग लागू कहां करेंगे। हर जगह तो लोग बसे हैं।
- डीएस राणा, सचिव उत्तराखंड इंजीनियर्स, ड्राफ्ट्समैन एसोसिएशन
अभी जोनल प्लान बनाए जाने का कार्य चल रहा है। कोशिश है कि इसे जल्द लागू किया जा सके। अगर कहीं भी तय लैंडयूज के विपरीत निर्माण पाया जाएगा तो उस पर कार्रवाई के लिए शासन स्तर से निर्णय लिया जाएगा।
- बंशीधर तिवारी, सचिव एमडीडीए
इसरो की मदद से करेंगे ‘हवाई’ सर्वे
जोनल प्लान पर करीब एक साल तक सर्वे कराने के बाद अब मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण को यह बात समझ आई है कि जमीन पर सर्वे करना मुश्किल है। अब सैटेलाइट मैपिंग से जोनल प्लान तैयार करने का दावा किया जा रहा है। इस काम में इसरो की मदद ली जाएगी।
एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि जियोग्राफिकल इनफोरमेशन सिस्टम के तहत सैटेलाइट के जरिये शहर की इमेज ली जाएगी। उन्होंने माना कि बेतरतीब आबादी की वजह से पुराना जोनल प्लान उपयुक्त नहीं रह गया है। सैटेलाइट इमेज सिस्टम हैदराबाद की एक कंपनी से खरीदा जा रहा है। इसरो की मदद से मैपिंग की जाएगी।