एक अप्रैल से प्रारंभ हो रहे नए वित्तीय सत्र में अब तक डायरेक्ट बेनिफिट ऑफ ट्रांसफर ऑन एलपीजी (डीबीटीएल) योजना से नहीं जुड़े उपभोक्ताओं की जेब कटनी तय है।
ऐसे उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से अगले तीन माह यानी जुलाई तक सिलेंडर की नॉन सब्सिडी कीमत ही चुकानी होगी। इस बीच एक अप्रैल से 30 जून तक अगर संबंधित उपभोक्ता योजना से जुड़ अपना बैंक खाता कनेक्शन संग लिंक करवा देते हैं तो जुलाई में तीनों महीनों की सब्सिडी राशि एक साथ उनके खाते में डाल दी जाएगी। लेकिन, खाता नंबर तब भी नहीं दिया तो यह रकम लैप्स हो जाएगी।
83 प्रतिशत उपभोक्ता जुड़े
उत्तराखंड में एक जनवरी से डीबीटीएल योजना शुरू हुई है। मार्च (आधा महीना) तक करीब प्रदेश के करीब 83 फीसदी उपभोक्ता योजना से जुड़ चुके हैं। इनमें से 75 फीसदी उपभोक्ताओं को सब्सिडी भी मिलने लगी है। हालांकि प्रदेश में 31 मार्च तक डीबीटीएल योजना से नहीं जुड़ने वाले उपभोक्ताओं को भी ग्रेस पीरियड के तहत सब्सिडी रेट पर ही सिलेंडर दिया जा रहा है।
सब्सिडी का फंडा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की घटती-बढ़ती कीमतों के अनुसार हर माह की पहली या आखिरी तारीख को गैस सिलेंडर की बाजार कीमत तय होती है। अभी नॉन सब्सिडी सिलेंडर की कीमत 646 रुपए है, जबकि सब्सिडी वाला सिलेंडर 438 रुपए में मिल रहा है।
डीबीटीएल योजना में उपभोक्ता को सिलेंडर रिफिल करने पर पूरी कीमत चुकानी होगी। बाद में तेल कंपनी द्वारा सरकार से मिलने वाली सब्सिडी राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कराई जाएगी। वर्तमान समय में उपभोक्ताओं को करीब 208 रुपए सब्सिडी के वापस मिल रहे हैं।
ऐसे करें आवेदन
- अपनी गैस एजेंसी से निशुल्क डीबीटीएल फार्म लेकर जानकारियां भरें
- बैंक खाता संख्या और गैस कनेक्शन के कागज ले जाएं साथ
- जिस उपभोक्ता के नाम पर गैस कनेक्शन है, उसका ही बैंक खाता कनेक्शन से जोड़ें
ऐसे भरें ऑनलाइन फॉर्म
- www.mylpg.in बेवसाइट खोलें
- आईओसी, बीपीसी, एचपीसी तीनों कंपनियों के लोगो होंगे, उपभोक्ता जिस कंपनी के ग्राहक हैं उस लोगों पर क्लिक कर खोलें
- हर तेल कंपनी के अलग-अलग लिंक खुल जाएंगे, जिस पर अपनी जानकारी दर्ज कर सीधे योजना से जुड़ सकते हैं
- बैंक एकाउंट नंबर, कंज्यूमर नंबर भी करना होगा दर्ज