इसके बाद उन्होंने जमीन के असली मालिक लाला सरनीमल और लाला मणिराम के नाम से 1958 का एक फर्जी बैनामा तैयार कर लिया। इसे हुमायूं के पिता जलीलूह रहमान और समीन के पिता अर्जुन प्रसाद के नाम करा लिया। इस बैनामे की अंग्रेजी में ड्राफ्टिंग अधिवक्ता देवराज तिवारी ने की, जिसे सना नाम की लड़की ने रजिस्ट्री के कागजों में नकल की।
बताया, आरोपियों ने सहारनपुर के रिकॉर्ड रूम में जिल्द चिपकाने के लिए वहां तैनात देव कुमार का सहारा लिया। उसे इस काम के तीन लाख रुपये दिए गए। तीन-चार दिन बाद वहां से नकल लेकर इस पर कब्जे लिए वाद एसडीएम कोर्ट में दायर कर दिया।
रद्दी की दुकान से भी लिए कागजात
फर्जी रजिस्ट्री बनाने के लिए समीर सहारनपुर में अब्दुल गनी नाम के कबाड़ी की दुकान पर भी गया। वहां से बहुत से पुराने कागज निकाले गए। पेपर की बिल्कुल उसी साइज की कटिंग और लाइनिंग समीर ने की। छपाई समीर ने कार्ड वालों के यहां करवाई। फर्जी रजिस्ट्री के पेपर को कॉफी या चाय के पानी में डुबाकर उन्हें सुखाते हुए उन पर प्रेस कर तैयार किए गए।