ये लोग खुद को यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ऑफिस का कर्मचारी बताते हैं। इसके बाद इनमें से एक इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका निवासी को कॉल करता है। मान लो गगन यहां से किसी रिचर्ड नाम के व्यक्ति को फोन लगाता है। गगन कहता है कि ऑफिस में रिचर्ड का पार्सल आया है।
यह अवैध रूप से आया हुआ है। रिचर्ड मना करता है तो उसे बताया जाता है कि उनकी आईडी का इस्तेमाल किया गया है। लिहाजा सारी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। जल्द ही वारंट निकलेगा और फिर गिरफ्तारी भी हो सकती है।
इन सब बातों को सुनकर जो व्यक्ति डर जाता है तो वह इससे बचने का उपाय पूछता है। इसके बाद गगन और उसके साथी दोबारा किसी दूसरे नंबर से रिचर्ड को फोन करते हैं और बचाव का तरीका बताकर कथित फाइल बंद कर देते हैं।
कूपन और बिटकॉइन में लेते हैं धन
लीगल एड यानी कानूनी सहायता के लिए यह ठग मुद्रा में धन कम ही लेते हैं। इसके लिए वह किसी ई-कॉमर्स कंपनी का कूपन लेते हैं। इसके अलावा बिटकॉइन में भी धन लिया जाता है। इसके बाद विभिन्न एक्सचेंज के माध्यम से इन्हें भारतीय रुपये में बदल लिया जाता है।
10 लाख रुपये महीने का तो केवल खर्च
इस कॉल सेंटर में सभी सैलरी पर काम करते हैं। इनमें से सीमन नाम के युवक की सैलरी 19 हजार रुपये और गगन की 17 हजार रुपये है। इसके अलावा सभी इसी के आसपास महीने में सैलरी पाते हैं। जबकि, कॉल सेंटर के संचालक ने इनके रहने खाने का बंदोबस्त भी किया हुआ है। इन्होंने मालसी में 11 कमरे 90 हजार रुपये प्रतिमाह और मैनेजर के लिए एक फ्लैट किराए पर लिया हुआ है। जबकि, इन सब व्यवस्थाओं और सैलरी पर संचालक करीब 10 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च करता है।