कुछ बड़ा हुआ तो उसे बांधकर रखा जाने लगा। हर दिन केवल एक रोटी खाने के लिए दी जाती और मांगता तो पिटाई की जाती। उसके जबड़े की हड्डी भी एक बार तोड़ दी गई थी। इससे वह बेहद कमजोर हो गया। सालों तक यही सब चलता रहा। सात दिन पहले उसके अंधेरे जीवन में एक ट्रक चालक रोशनी बनकर आया। ट्रक चालक देहरादून से वहां बकरियां लेने गया था। मौका पाते ही युवक ने उसे अपनी कहानी बता दी। ड्राइवर ने भी चालाकी से काम लिया और जाते वक्त उसे अपने साथ ट्रक में छिपा लिया।
वहां से उसे दिल्ली लेकर आया और ट्रेन में बैठाकर देहरादून पुलिस तक पहुंचने का रास्ता भी कागज पर लिखकर दे दिया। इस कागज को पढ़वाते हुए ही वह पुलिस तक पहुंचा। उसके हाथ पर राजू नाम लिखा है, लेकिन इसे भी पुराने नाम या किसी चिह्न को काटकर दोबारा गुदवाया गया है।
घंटाघर के पास रैन बसेरे में ठहरा है युवक
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर प्रदीप पंत ने बताया कि युवक को अपना नाम-पता कुछ मालूम नहीं था। ऐसे में उसके ठहरने की व्यवस्था घंटाघर के पास रैन बसेरे में की गई है। उसे इतना पता है कि उसके घर के पास एक सब्जी मंडी है। झंडा मेला आने तक वहां से आधा घंटा लगता था। इंस्पेक्टर पंत ने बताया कि उसकी फोटो को सभी थानों में भेज दिया गया है। घरवालों को तलाशने का प्रयास किया जा रहा है।