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देहरादून: किराये के भवनों में चल रहे हैं आंगनबाड़ी केंद्र, कई  केंद्रों की हुई जर्जर हालत 

Fri, 08 Oct 2021 10:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

दून में ही आंगनबाड़ी केंद्रों के पास न भवन हैं और न ही अन्य सुविधाएं। आलम यह है कि किराए के भवनों में एक छोटे से कमरे में केंद्र संचालित हो रहे हैं।
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किराये के भवन में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की सरकार की योजना है। जिससे निजी स्कूलों के प्ले ग्रुप मॉड्यूल की बराबरी की जा सके, लेकिन वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों की जो हालत है, उससे सरकार की मंशा सफल हो पाएगी, इस पर संशय बना हुआ है। क्योंकि, दून में ही आंगनबाड़ी केंद्रों के पास न भवन हैं और न ही अन्य सुविधाएं। आलम यह है कि किराए के भवनों में एक छोटे से कमरे में केंद्र संचालित हो रहे हैं। जहां भवन हैं उनकी हालत भी जर्जर बनी हुई है।   

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चुक्खूवाला आंगनबाड़ी केंद्र नंबर एक जिस भवन में चल रहा है, वह झोपड़ी की तरह लग रहा है। यहां 13 बच्चों का पंजीकरण है, जबकि आते हैं करीब 35 बच्चे। यहां  किसी तरह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता टिन के चादरों के ऊपर तिरपाल, पन्नी डालकर व्यवस्था की है। भवन इतना जर्जर हालत में हैं कि कभी भी यह गिर सकता है। वर्तमान में हालांकि केवल राशन बांटने के लिए ही आंगनबाड़ी केंद्रों को खोला जा रहा है, लेकिन अन्य दिनों बच्चों को बैठाने की व्यवस्था करना भारी पड़ जाता है। यहां एक कार्यकर्ता और सहायिका तैनात है।

कार्यकर्ता प्रीति पांडे ने बताया कि सरकार उन्हें ऑनलाइन प्रशिक्षण तो दे रही है, लेकिन अन्य सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। भवन की हालत खराब है। इतना बजट भी नहीं मिलता कि वह इसकी सही से देखरेख कर सकें। सरकार को अगर आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करना है कि इसके लिए भवन के साथ ही अन्य सुविधाएं देनी होंगी।
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चुक्खूवाला आंगनबाड़ी केंद्र नंबर दो किराए के एक कमरे में चल रहा है। यहां 15 पंजीकृत बच्चे हैं। जिस कमरे में केंद्र संचालित हो रहा है, वहां बमुश्किल पांच से सात बच्चों के बैठने की जगह है। यहां की सहायिका विमला डोरा ने बताया कि सरकारी भवन न होने के कारण केंद्र किराए के कमरे में चल रहा है। इतना किराया भी नहीं मिलता है कि दो-तीन कमरे किराए पर लिए जा सकें। किराए मिलता भी है तो कई-कई महीनों के बाद। सरकारी काम का बोझ इतना है कि एक कार्यकर्ता को हर समय बाहर रहना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के साथ ही उन पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। 
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आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति 
जिले में आंगनबाड़ी केंद्र -               1657
मिनी आंगनबाड़ी केंद्र -                   250
आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता -         1883  
आंगनबाड़ी केंद्रों में मिनी सहायिका - 1631

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