जो चीजें मुंबई में आर्टिफिशियल बनाई जाती हैं। वह उत्तराखंड में प्रकृति की देन हैं। यहां हुनर भी है और अद्भुत जगह भी। बस इसे विकसित करने की जरूरत है। राज्य सरकार यह काम कर सकती है। अभिनेता गजेंद्र चौहान ने लोकल टैलेंट को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड में ही फिल्म इंस्टीट्यूट खोले जाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि प्रत्येक राज्य में फिल्म इंस्टीट्यूट खोला जाना चाहिए। ताकि स्थानीय स्तर पर ही अगर युवाओं को ट्रेनिंग मिले तो उन्हें मुंबई जाकर संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।
बतौर चौहान प्रत्येक राज्य में एक फिल्म इंस्टीट्यूट का होना जरूरी है। ताकि फिल्म इंडस्ट्री में आने के इच्छुक युवाओं को मुंबई में जाकर संघर्ष न करने पड़े। फिल्म सिटी विकसित की जानी चाहिए, लेकिन उससे पहले फिल्म इंस्टीट्यूट प्रत्येक राज्य को बनाना चाहिए। मुंबई का कलाकार तो यहां शूटिंग के लिए आएगा, साथ ही यहां के लोकल टैलेंट को भी मौका मिलेगा। कहा कि मुंबई लौटने पर वहां की फिल्म फेडरेशन द्वारा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र भेजूंगा, जिससे कि इस विचार को आगे बढ़ाया जा सका।
मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर चौहान ने बताया कि सरकार का रुख इस विषय को सकारात्मक हैै। यकीनन इस पर आगे काम किया जाएगा। उत्तराखंड की खूबसूरती के कायल चौहान ने कहा कि यह राज्य प्रदूषण मुक्त है और मुंबई में प्रदूषण ही प्रदूषण है। यहां की प्रकृति, धार्मिक महत्व हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। उन्होंने कहा कि मेरा बहुत धार्मिक कॅरिअर रहा है। अपने किरदारों से मैंने अलग-अलग संदेश देने की कोशिश की। मैं इस देवभूमि की संस्कृति संस्कार और भोलेनाथ का आशीर्वाद लेकर मुंबई जाऊंगा।
पाठ्यक्रम में शामिल की जाए सिनेमा की पढ़ाई
बॉलीवुड सितारों ने टॉक शो के दौरान अपने अनुभव साझा करने के साथ दर्शकों के साथ संवाद किया। बॉलीवुड सितारों ने कहा कि सिनेमा के हर पहलू को समझने के लिए स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में सिनेमा की पढ़ाई शामिल की जाए। इसका उन युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा जो सिनेमा में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। हरिद्वार बाईपास रोड स्थित एक होटल में आयोजित टॉक शो में वरिष्ठ पत्रकार कावेरी बामजई के साथ बात करते हुए अभिनेता आदित्य सील, अखिलेंद्र मिश्रा और अभिनेत्री मीता वशिष्ठ ने अपने अनुभव साझा किए।
एक दर्शक के सवाल पर बॉलीवुड सितारों ने कहा कि बदलते समय के बाद बदलते सिनेमा को को दर्शक ही सही दिशा में ला सकते हैं। गलत प्रभाव छोड़ जाने वाली फिल्म, नाटक या कहानियों को अगर दर्शक देखेंगे ही नहीं तो फिल्म निर्माता निर्देशक ऐसी फिल्म या कहानी को पर्दे पर लाएंगे ही नहीं। इस मौके पर तीनों बॉलीवुड कलाकारों के साथ लोगों ने जमकर सेल्फी भी ली।
फेस्टिवल में शिरकत कर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फिल्म निर्माताओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को सम्मानित करने के साथ ही विशाल स्वामी निर्देशित फिल्म बधाई हो बेटी हुई है भी देखी। रावत ने उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य को रूपहले पर्दे पर दिखाने के लिए फिल्म निर्माताओं को बार-बार उत्तराखंड आने को कहा।
राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में आयोजित फिल्म फेस्टिवल का शनिवार को दूसरा दिन था। यहां देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मेयर सुनील उनियाल गामा और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर मां भवानी पहुंची थीं। अमर उजाला इस आयोजन का मीडिया पार्टनर है। तीनों मेहमानों ने यहां मौजूद फिल्म निर्माताओं को सम्मानित किया।
पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार फिल्म नीति को लेकर बहुत बेहतर काम कर रही है। हम फिल्म निर्माताओं को यहां आने का निमंत्रण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्माता यहां आएं और काम करें। सरकार आपको पूरा सहयोग देगी। फिल्म फेस्टिवल को एक सराहनीय पहल बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन सभी को नई ऊर्जा और अवसर देते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां विशाल स्वामी निर्देशित फिल्म बधाई हो बेटी हुई है भी देखी।
ये हुए सम्मानित
‘रैना-होस्टल की वो रात’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक एसएसडोगरा, सह निर्देशक अपूर्व श्रीवास्तव को संस्थापक राजेश शर्मा और फेस्टिवल डायरेक्टर रुचिन कोहली ने सम्मानित किया। गौरतलब है कि डोगरा वर्तमान में एफआईएमटी कॉलेज आईपी यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता व जनसंचार विभाग में कार्यरत हैं। उनकी फिल्म उत्तराखंडी वरियर्स को चौथे देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी पुरस्कृत किया गया था।