लंबे समय तक राष्ट्रीय शूटिंग परिदृश्य से दूर रहे जसपाल राणा ने देहरादून में भी शूटर तैयार किए। पौंधा में उनकी जसपाल राणा शूटिंग एकेडमी भी है। जहां जसपाल राणा अपने पिता नारायण सिंह राणा के साथ मिलकर युवा निशानेबाजों को तैयार कर रहे हैं।
राजनीति में भी आजमाया हाथ
जसपाल राणा ने शूटिंग के अलावा राजनीति में भी हाथ आजमाया। हालांकि उन्हें यहां निराशा हाथ लगी। 2009 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें कांग्रेस के विजय बहुगुणा के हाथों हार झेलनी पड़ी। बाद में 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
जसपाल राणा को अब तक मिले पुरस्कार
-अर्जुन पुरस्कार 1994, यश भारती पुरस्कार (1994), राजधानी रत्न पुरस्कार, इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार आदि।
पिछले साल भी भेजा गया था नाम
पिछले साल भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए राणा का नाम भेजा था लेकिन उन्हें पुरस्कार नहीं दिया गया। इस पर काफी विवाद हुआ था । एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता राणा ने मनु भाकर, सौरभ चौधरी और अनीश भानवाला जैसे विश्व स्तरीय निशानेबाज तैयार किए हैं।