लंबे समय तक उनके जोड़ीदार रहे मनमोहन कंडवाल को भी 865 वोटों के साथ दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। पहले नंबर पर रहे राजीव शर्मा उर्फ बंटू भाई को सबसे अधिक 931 वोट पड़े। इस तरह उन्होंने मनमोहन कंडवाल को 66 वोटों से हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा किया।
राजीव शर्मा दो बार अध्यक्ष और दो बार सचिव रह चुके हैं। अंतिम बार वह कार्यकारिणी में 2017 में रहे थे। उस वक्त अध्यक्ष पद पर उन्हें मनमोहन कंडवाल ने हराया और इसके बाद लगातार पांच बार अध्यक्ष रहे। इस दरम्यान दो साल कोरोनाकाल के चलते चुनाव नहीं हुए थे।
अध्यक्ष के चुनाव में सबसे कम वोट अधिवक्ता शिवचरण सिंह रावत को पड़े। उनके खाते में कुल 28 वोट आए। जबकि, चौथे नंबर पर रहे आलोक घिल्डियाल को महज 115 वोट से ही संतोष करना पड़ा। उधर, पिछली बार सचिव पद पर चुने गए राजबीर सिंह बिष्ट इस बार भी अपनी सीट बचा गए। जबकि, उपाध्यक्ष पद पर भानू प्रताप सिसौदिया ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की।