उत्तराखंड में श्रीनगर के बेस अस्पताल में हाथ के ऑपरेशन के लिए बेहोशी का इंजेक्शन देने के बाद हालत बिगड़ने पर एक युवक की मौत हो गई।
युवक के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया। परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे जाम कर दिया।
देर शाम नायब तहसीलदार की तरफ से जांच का लिखित आश्वासन देने के बाद ही लोग जाम खोलने को राजी हुए।
जानकारी के अनुसार पौड़ी जिले के सरणा, पैठाणी निवासी सुरेश चंद्र (23 वर्ष) पुत्र रामचंद्र भट्ट के हाथ की हड्डी क्रिकेट खेलते समय टूट गई थी।
एनेस्थीसिया देते ही बिगड़ने लगी हालत
डॉक्टरों की सलाह पर परिजनों ने सुरेश को 9 जुलाई को बेस अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। शनिवार सुबह ऑपरेशन किया जाना था। सुबह ग्यारह बजे आपरेशन थिएटर में एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया गया।
बताया जाता है कि इंजेक्शन लगते ही युवक की हालत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने करीब चार घंटे तक युवक को वेंटिलेटर पर रखा। इसके बाद डॉक्टरों ने युवक की मौत होने की जानकारी परिजनों को दी।
मौत की सूचना मिलते ही युवक के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया।
परिजनों के साथ व्यापार संघ के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हाईवे पर जाम लगा दिया।
ऑपरेशन थियेटर में ही हो गई थी मौत
कोतवाल उत्तम सिंह ने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। देर शाम करीब आठ बजे नायब तहसीलदार सुंदर सिंह रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को लिखित आश्वासन दिया कि मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी।
जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा कि उसके खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। इसके बाद ही लोग जाम खोलने को तैयार हुए।
युवक के भाई रमेशचंद्र और जीजा सतीश तिवारी का आरोप है कि सुरेश की मौत सुबह 11 बजे ऑपरेशन थिएटर में ही हो गई थी, लेकिन डाक्टरों ने परिजनों को गुमराह करते हुए शव को चार घंटे तक वेंटिलेटर में रखा। उनका कहना था कि एनेस्थीसिया की ओवरडोज के कारण को ही सुरेश की मौत हुई।
कार्डियो पल्मोनरी अरेस्ट से मौतः एनेस्थेसिस्ट
सुरेश को एनेस्थीसिया देने वाले एनेस्थेसिस्ट डा. संजुल के मुताबिक रोगी का ह्दय कमजोर होने से एनेस्थीसिया लगते ही कॉर्डियो पल्मोनरी अरेस्ट हो गया और उनका बीपी और हार्ट बीट कम होता चला गया। जिससे रोगी की मौत हो गई। हालांकि रोगी को वेंटिलेटर पर रखकर बचाने की पूरी कोशिश भी की गई।
पूर्व में हो चुका था प्रि एनेस्थेटिक चेकअप
ऑपरेशन से पूर्व एनेस्थीसिया विभाग में सुरेश का प्री एनेस्थेटिक चेकअप किया गया था। एनेस्थीसिया विभाग के कमरा नंबर 18 में हमेशा ही आपरेशन से पूर्व पीएसी किया जाता है जिसमें रोगी के एक्सरे, रक्त संबंधी सभी जांच होती हैं।
जिसमें हार्ट संबंधी या अन्य समस्याओं का निरीक्षण भी किया जाता है। एनेस्थीसिया विभाग में डाक्टरों की कमी के चलते कई बार पीएसी के लिए ही कई दिनों तक रोगियों को इंतजार करना पड़ता है।
पुलिस सक्रिय, दस्तावेज किए सील
परिजन और स्थानीय लोगों के हंगामे के बाद पुलिस भी हरकत में आ गई। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर युवक के उपचार से संबंधित सभी दस्तावेज कब्जे में लेकर सील कर दिए।
डॉक्टरों का है कहना
यह फैकल्टी से जुड़ा मामला है, इसलिए अस्पताल प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। कॉर्रवाई कालेज प्रशासन या शासन स्तर पर ही सुनिश्चित हो सकती है। युवक का इस तरह मौत होना दुखद है।
-डॉ. डीएल शाह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल
यह मामला राजकीय मेडिकल कालेज की व्यवस्थाओं की पोल खोलता है। यह दयनीय स्थिति के लिए यदि जनता मुझे जिम्मेदार मानती है, तो मैं भी इसका दोषी हूं। इस मामले के लिए जिम्मेदार सभी वरिष्ठ डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई के साथ ही हत्या का मुकदमा भी दर्ज होना चाहिए।
-गणेश गोदियाल, स्थानीय विधायक